🌕 पूर्णिमा मेष राशि में ♎️ २८ मार्च
⏰ पूर्णिमा मेष राशि में २८ मार्च की शाम २०:४८ बजे (कीव समयानुसार, १८:४८ जीएमटी) होगी। चंद्रमा मेष राशि के ८ अंश में होगा।
♎️♈️ पूर्णिमा मेष-तुला राशि की धुरी पर घटित होगी। यह धुरी हमारे स्वयं के हितों और दूसरों की आवश्यकताओं के बीच संतुलन प्राप्त करने की है। किंतु यह विषय हमें एक पक्ष चुनने के लिए बाध्य नहीं करता, क्योंकि हम निरंतर विरोधाभासों के बीच संतुलन बनाते रहते हैं। इस समय हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, अपने लिए सर्वाधिक सुविधाजनक बातचीत के तरीके को ढूंढना। विशेष रूप से वे लोग इस अवधि को तीव्रता से अनुभव करेंगे जिनके कुंडली में यह धुरी ग्रहों द्वारा प्रमुखता से चिह्नित है। अपने कुंडली में उन भावों पर भी ध्यान दें जिनमें पूर्णिमा प्रवेश कर रही है। ये वही विषय हैं जिनके साथ इस अवधि में प्रभावी कार्य किया जा सकता है।
💪 यह पूर्णिमा हमारी अंतर्दृष्टि और बोध से भरपूर है, किंतु ये बोध हमारे लंबे विचार-विमर्श और पूर्व के भटकाव का परिणाम होंगे। चंद्रमा वायु त्रिकोण में स्थित है, जो शनि और मंगल के साथ त्रिकोण बनाता है। इसलिए सामंजस्य स्थापित करने के लिए हम अपने अनुभव/संचित ज्ञान को स्वीकार करें और नवीन ज्ञान/सत्य की खोज में सक्रिय रहें। प्रत्येक व्यक्ति इस ग्रहीय संबंध का उपयोग अपने तरीके से कर सकता है, अपने लिए सर्वाधिक प्राकृतिक संतुलन स्थापित करते हुए। मुख्य बात यह है कि त्रिकोण के केवल एक शीर्ष पर ही केंद्रित न रहें, अन्यथा आपकी शक्ति दुर्बलता में परिवर्तित हो सकती है।
❓ सूर्य का मेष राशि में शुक्र के साथ युति तीव्र इच्छा उत्पन्न करती है किंतु स्पष्ट उद्देश्य का अभाव है। इसलिए हमारी सारी ऊर्जा पूर्व निर्धारित लक्ष्यों में से सच्चे लक्ष्यों की खोज में लग जाएगी। वे लक्ष्य जो हमें केवल भावनात्मक अनुभवों से ही नहीं, अपितु बुद्धि से भी प्रज्ज्वलित कर सकें।
👥 इस दिन के सभी स्पर्शों को दूसरों के साथ साझा करें, विशेष रूप से यदि वे किसी प्रकार से उनसे संबंधित हों। इस समय आपको प्राप्त ज्ञान का बीज केवल बाह्य जगत और अन्य लोगों के साथ अंतर्क्रिया द्वारा ही विकसित हो सकता है। इसलिए मिथ्या स्रोत होने के भय (उत्तर node द्वारा मिथुन राशि में) को त्याग दें और अपने भीतर प्रकट ज्ञान के बीज को बाहर प्रसारित करें।
☝️ किसी भी पूर्णिमा की तरह, इसके कुछ दिन पूर्व और पश्चात् शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रूप से अधिक भार न उठाएं। इसका अर्थ यह नहीं कि कुछ भी न करें, इसके विपरीत इस समय कार्य करना अत्यंत लाभकारी है किंतु व्यक्तिगत अथवा सार्वजनिक रिकॉर्ड बनाने का प्रयास न करें।
🤔 मेष राशि में पूर्णिमा हमारे अस्तित्व के सामंजस्य की ओर प्रेरित करती है। इस समय हमारा आंतरिक केंद्र सृजनात्मक ऊर्जा से भरपूर है, इसलिए बाह्य सूचना स्रोतों के प्रति सावधान रहें किंतु उन्हें अपने विश्वदृष्टिकोण से ही गुजरने दें। इस अवधि में हमारी सच्ची प्रकृति का उद्घाटन अत्यंत स्वाभाविक और पीड़ारहित हो सकता है तथा हमारे परिजनों और समग्र जीवन में क्रमिक रूप से प्रकट होना आरंभ हो सकता है। मूर्त परिणामों की अपेक्षा न करें, इस समय समझ विकसित करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
सुंदर जीवन-लय में सामंजस्य स्थापित करने की शुभकामनाएं 😌!