आप किस तत्त्व से संबंधित हैं? बाहरी रूप से अपनी तत्त्व पहचानें!
तत्त्व
व्यक्तिगत ज्योतिषीय आहार तैयार करने में आपकी जन्म कुंडली में तत्त्वों का अनुपात अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। किंतु यदि आपके पास अपनी जन्म कुंडली नहीं है और अभी इसे किसी ज्योतिषी से तैयार कराने का अवसर नहीं मिला है, तो आप अपनी “स्वाभाविक” तत्त्व (जो आवश्यक नहीं कि आपके सूर्य राशि की तत्त्व हो) की पहचान कैसे कर सकते हैं? हम आपको बाहरी रूप से अपनी तत्त्व पहचानने का सुझाव देते हैं।
आप किस तत्त्व से संबंधित हैं?
अग्नि तत्त्व के लोग सामान्यतः प्रभावशाली बाहरी रूप वाले, आकर्षक, लंबे, प्रभावशाली, आवेगी, चमकीले एवं सक्रिय होते हैं। उनकी विशेषताओं में सीधी रेखाएँ, तीक्ष्णता होती है। अग्नि राशि वालों की आँखें चौड़ी एवं चमकीली होती हैं, नाक में अक्सर कूबड़ होता है, माथा ढलवाँ होता है, गंजापन होने की प्रवृत्ति होती है; ठुड्डी भारी एवं आगे को निकली होती है, दाँत बड़े होते हैं। बाल घने एवं लंबे होते हैं। शरीर का ऊपरी भाग सामान्यतः अधिक विकसित होता है, हाथ, पैर एवं गर्दन छोटे होते हैं। चलने का तरीका तेज होता है, पैरों को कठोरता से रखते हैं, गतियाँ तीक्ष्ण होती हैं एवं वे सामान्यतः सीधी रेखा में चलते हैं। आवाज़ ऊँची, तीक्ष्ण, कंठस्थ एवं मांग करने वाले स्वर में होती है। सक्रिय वार्तालाप में रुचि रखते हैं एवं आसानी से विवाद में कूद पड़ते हैं। बैठते समय पीठ सीधी रखते हैं। वस्त्रों में खेल शैली एवं चमकीले रंगों को पसंद करते हैं।
स्वाद संबंधी वरीयताएँ – तीक्ष्ण, गरम, खट्टा, नमकीन। उन्हें गरम एवं मसालेदार भोजन पसंद होता है।
पृथ्वी तत्त्व के लोग सामान्यतः भारी शरीर वाले, स्थिर, शांत, उत्तरदायी एवं संवेदनशील होते हैं। वे सामान्यतः मजबूत कद-काठी वाले, चौकोर आकार के, मध्यम कद के, हष्ट-पुष्ट होते हैं, जिनके हाथ एवं पैरों की हड्डियाँ बड़ी होती हैं। चेहरा ऐसा लगता है जैसे मिट्टी से गढ़ा गया हो (उम्र बढ़ने के साथ गालों में ढीलापन आता है), चौड़ी गाल की हड्डियाँ होती हैं। आँखें छोटी, गहरी बैठी एवं पास-पास होती हैं, दृष्टि स्थिर होती है। पलकें भारी, घनी भौंहें, अक्सर भौंहें आपस में जुड़ी होती हैं। नाक बड़ी, नीचे से चौड़ी, माथा नीचा एवं उभरा हुआ, मुँह छोटा, होंठ भीतर को मुड़े हुए, मुँह के कोने नीचे की ओर झुके होते हैं, ठुड्डी भारी होती है। बाल घने होते हैं। चलने का तरीका भारी होता है, गतियाँ स्थिर, धीमी किंतु स्पष्ट एवं सटीक होती हैं। वे हाथों की अंगुलियों को आपस में जोड़ना या मुट्ठियाँ बनाना पसंद करते हैं, घुटनों या कमर पर हाथ रखते हैं। हाथ मिलाते समय पकड़ मजबूत एवं भारी होती है, शिष्टाचार में कठोरता होती है। कम मिलनसार होते हैं, संपर्क स्थापित करने में कठिनाई होती है एवं बातचीत के विषय खोजना उनके लिए मुश्किल होता है। शांत, उत्तरदायी एवं संवेदनशील स्वभाव के होते हैं। आवाज़ नीची, कर्कश, प्रायः रंगहीन अथवा अधिकारपूर्ण स्वर वाली होती है। बैठते समय स्थिरता से बैठते हैं, कम ही मुद्रा बदलते हैं एवं दोनों पैरों से जमीन पर दृढ़ता से टिके रहते हैं। वस्त्रों में सख्त एवं व्यावहारिक शैली पसंद करते हैं। प्रकृति में शरद ऋतु के रंग, भूरा, गेरुआ, पीला, दलदली हरा, टेराकोटा आदि रंगों को पसंद करते हैं। उन्हें कठोर एवं गाढ़ा भोजन, मीठा अथवा कड़वा स्वाद पसंद होता है।
वायु तत्त्व के लोग सामान्यतः हल्के, नुकीले आकार वाले एवं ऊपर की ओर उन्मुख होते हैं। सामान्यतः दुबले-पतले कद के, लंबे, सुंदर एवं अपनी उम्र से छोटे दिखाई देते हैं। शरीर हल्का एवं पतला होता है। उनके लंबे एवं सुंदर हाथ-पैर होते हैं। चेहरे की विशेषताएँ नुकीली होती हैं एवं चेहरे का भाव अक्सर बदलता रहता है। दृष्टि दौड़ती हुई, आँखों के कोने थोड़े ऊपर उठे हुए, नाक आगे को निकली हुई (बुरatina प्रोफाइल) होती है। होंठ प्रायः असामान्य आकार के, मुखरेखा स्पष्ट, दाँत छोटे, ठुड्डी छोटी एवं हल्की, प्रायः तिरछी होती है। माथा ऊँचा एवं खुला, बाल पतले एवं छोटे होते हैं। चलने का तरीका हल्का एवं उछलता हुआ होता है। हाथों की गतियाँ असंतुलित हो सकती हैं। हाथों के इशारे स्वतंत्र, तेज एवं ज़िगज़ैग पथ वाले होते हैं। हाथ मिलाते समय पकड़ हल्की एवं सूखी होती है। आवाज़ ऊँची, звонкая, तीखी होती है। स्वभाव से मिलनसार होते हैं एवं आसानी से संपर्क स्थापित कर लेते हैं। बहुत जिज्ञासु होते हैं। कुर्सी के किनारे पर बैठना पसंद करते हैं, पैर पर पैर रखना, बार-बार मुद्रा बदलना एवं पहले मौके पर उठ खड़े होने के लिए तैयार रहते हैं। वस्त्रों में रोमांटिक शैली एवं नीले, बैंगनी रंगों को पसंद करते हैं। उन्हें हल्का, गरम एवं विभिन्न स्वादों के मिश्रण वाला भोजन पसंद होता है।
जल तत्त्व के लोग कोमल, लचीले, कोमल स्वभाव के, सामान्यतः छोटे कद के, मोटापे की प्रवृत्ति वाले, शरीर में गोलाई एवं नरमता लिए होते हैं, त्वचा पीली होती है। आँखें बड़ी, आँखों के कोने नीचे की ओर झुके हुए, पलकें झुकी हुई, दृष्टि धुँधली एवं भटकती हुई, आँखों का रंग प्रकाश के अनुसार बदलता रहता है, दुर्लभ ही आँखों में आँखें डालकर बात करते हैं। नाक चपटी, नाक का अगला भाग ऊपर की ओर उठा हुआ अथवा नीचे से चौड़ा, माथा छोटा एवं उभरा हुआ, नाक के साथ मिलकर चेहरा तरंगित रेखा बनाता है। होंठ फूले हुए एवं बँटुए होते हैं। ठुड्डी गोल, कभी-कभी उसमें गड्ढा होता है, प्रायः दूसरी ठुड्डी भी होती है। हाथ एवं अंगुलियाँ छोटी एवं मोटी होती हैं। शरीर की आकृतियाँ धुँधली एवं त्वचा पीली होती है। गतियाँ धीमी होती हैं। स्वभाव से कोमल एवं कोमल लगते हैं। चलने का तरीका लहराता हुआ, पैरों को कोमलता से रखते हुए, कूल्हों को हिलाते हुए। हाथों की गतियाँ धीमी एवं लहराती हुई होती हैं। हाथ मिलाते समय पकड़ निस्तेज एवं गीली होती है। उनके व्यवहार में बिल्ली जैसे गुण होते हैं। आवाज़ कोमल, धीमी, गले से निकलने वाली, भावनात्मक एवं गायन अथवा प्रश्नवाचक स्वर वाली होती है। संपर्क स्थापित करने में सावधानी बरतते हैं एवं आसानी से साथी के प्रभाव में आ जाते हैं, उसकी बातचीत की शैली की नकल करते हैं। बातचीत के दौरान ध्यान भटकाते हैं एवं अपने विचारों एवं भावनाओं में खो जाते हैं। बातचीत की शैली देर से प्रतिक्रिया देने वाली होती है। भावनात्मक वातावरण में सूक्ष्म परिवर्तनों पर प्रतिक्रिया करते हैं। उत्तर देने से बचते हैं। समूह में वे सबसे आरामदायक एवं सुविधाजनक स्थान की तलाश करते हैं। सामान्यतः झुककर बैठते हैं, सिर को हाथ से सहारा देना अथवा सिर को एक ओर झुकाकर बैठना पसंद करते हैं। लंबे एवं ढीले कपड़े, नीले, हरे, गुलाबी एवं मावे रंगों को पसंद करते हैं। उन्हें हल्का, तरल एवं ठंडा भोजन पसंद होता है।
शुद्ध प्रकार शायद ही कभी होते हैं, प्रायः दोहरे अथवा तिहरे प्रकार होते हैं। अतः यदि आपको यहाँ अपने आप को पहचानने में कठिनाई हो रही है, तो आप सदैव किसी ज्योतिषी से संपर्क कर अपनी जन्म कुंडली तैयार करवा सकते हैं, जिसमें स्पष्ट रूप से आपकी प्रमुख तत्त्व का उल्लेख होगा। स्वयं का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें अथवा अपने निकटवर्तियों से पूछें।



