🌕 पूर्ण चंद्र ग्रहण 🌑 ८ नवंबर
८ नवंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। इसका चरम ८ नवंबर को कीव समयानुसार १३.०१ बजे (११.०१ जीएमटी) आएगा।
ग्रहण के दौरान हम वृषभ-वृश्चिक अक्ष के कार्यों को पूर्ण करते हैं तथा अपने जीवन मूल्यों का पुनर्मूल्यांकन करते हैं, जो धीरे-धीरे जीवन के सभी क्षेत्रों पर प्रभाव डालेंगे। वसंत ऋतु के सूर्य ग्रहण के दौरान हमने नए मूल्यों का निर्माण किया था, अब हमारे जीवन से वे सभी चीज़ें निकल जाएँगी जो इन मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। यह स्थान की शुद्धि तथा ऊर्जा को मुक्त करने की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो नए गतिविधि के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
ग्रहण वृषभ राशि के १६ अंश में होगा। हमारी भौतिक जीवन की नींव पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। परिवर्तन व्यापक होंगे, इसलिए सभी लोग तुरंत अपने जीवन पर इसके प्रभाव को नहीं समझ पाएँगे। अंततः परिवर्तन वित्तीय क्षेत्र तथा भौतिक संसाधनों के स्वामित्व में होंगे, किंतु अभी ये परिवर्तन संबंधों अथवा व्यावसायिक संभावनाओं में शुरू हो सकते हैं – वहाँ जहाँ हमारे पास ऊर्जा की कमी अथवा अधिकता है।
यह ग्रहण वर्ष के ग्रहणों के गलियारे को बंद करता है। ध्यान देने योग्य है कि पिछले वर्ष वृषभ राशि में आंशिक चंद्र ग्रहण हुआ था तथा इन ऊर्जाओं में वर्ष भर में पूर्व में अपूर्ण संभावनाएँ पूर्ण हुईं। २०२२ का पूर्ण चंद्र ग्रहण हमारे उन निर्णयों तथा विकल्पों का परिणाम प्रस्तुत करेगा जो भौतिक जगत के साथ हमारे संबंधों से जुड़े हैं – हमने अपने आंतरिक प्राथमिकताओं को स्थापित किया तथा जो कुछ गौण रहा, उससे हमारे संबंध टूट रहे हैं।
वर्तमान में सूर्य बुध तथा शुक्र के साथ युति में है। हमारे विचार तथा भावनाएँ उन इच्छाओं को प्रतिबिंबित करती हैं जिन्हें हम पूर्ण नहीं कर सके अथवा जो हमारे लक्ष्यों के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए हमारे अनुभव क्रोध तथा निराशा से लेकर उदासी तथा उदासीनता तक परिवर्तित हो सकते हैं। स्वयं को उन सभी बंधनों से मुक्त करने दें जो आपको जकड़े हुए हैं, किंतु अपने अनुभवों को दूसरों पर स्थानांतरित न करें। आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने को स्थगित करना बेहतर होगा।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा युरेनस के साथ युति करेगा, जिससे अचानक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं जो हमें विचलित कर सकती हैं तथा पीड़ादायक लग सकती हैं, क्योंकि यह ग्रहण चंद्र ग्रहण है, किंतु ये हमारे पिछले निर्णयों तथा कार्यों के परिणाम मात्र हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों ग्रह शनि के साथ वर्ग में हैं। यह योग परिवर्तन की प्रक्रिया में कठोरता तथा हमारे प्रयासों की सीमाओं को प्रकट कर सकता है। किंतु साथ ही, वर्तमान परिस्थितियाँ पूर्व में ही दृष्टिगोचर तथा समझ में आ चुकी थीं। पश्चगामी मंगल हमें ऐसा अनुभव करा सकता है मानो हम कुछ भी प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं, किंतु अनेक प्रश्नों को हम वर्तमान में ही पुनः निर्मित तथा सुधार सकते हैं, इसलिए उन बातों पर ध्यान केंद्रित करें जिनका भविष्य में निरंतर विकास हो सके।
ग्रहण का प्रभाव हम तीन दिनों तक (एक दिन पूर्व, स्वयं ग्रहण तथा एक दिन पश्चात) तीव्रता से अनुभव कर सकते हैं, किंतु यह ग्रहण लगभग दो सप्ताह तक (ग्रहण से एक सप्ताह पूर्व तथा एक सप्ताह पश्चात) महसूस किया जा सकता है। स्वयं ग्रहण के दौरान आरामदायक वातावरण में रहना उत्तम है। अपने तथा अपने निकटस्थ व्यक्तियों के व्यवहार तथा अनुभवों पर ध्यान दें। वर्तमान में स्थिर रहने वाली बातों पर ध्यान केंद्रित करें ताकि आपको आधार मिल सके। यदि आप उन बातों से चिपके रहेंगे जो जा रही हैं, तो वर्तमान घटनाएँ आपके पैरों तले की जमीन खींच लेंगी। स्वयं के प्रति सच्चे रहें तथा जीवन के किसी भी मोड़ के लिए आंतरिक रूप से तैयार रहें।
परिवर्तन के दौरान भी आंतरिक शांति की कामना करता हूँ!