पहली छमाही में हमें ऐसे संकेत मिलते हैं जो बताते हैं कि जीवन पथ पर आगे बढ़ने के लिए किस दिशा में बेहतर प्रयास करना चाहिए। आज हम बेहतर बदलाव ला रहे हैं, और इसी के साथ हमारे लक्ष्यों एवं कार्यों की सामग्री भी बदल रही है। इसलिए हमारे पास अपने विचारों को साकार करने और अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त शक्ति है। मगर इसका मतलब यह नहीं कि परिणाम जादुई तरीके से मिल जाएगा—सफलता हमारे प्रयासों का परिणाम होगी। मगर प्रेरणा से यह कार्य आसानी से पूरा हो सकेगा।
इस समय अधिक तरल पदार्थ पीना, जल संबंधी प्रक्रियाएं करना और स्नान करना अच्छा रहता है। इस प्रकार ऊर्जात्मक शुद्धि होगी और हमारे सभी शरीरों का सामंजस्य स्थापित होगा। यह सामंजस्यपूर्ण अवस्था आवश्यक है ताकि हम अपनी इच्छाओं एवं बाहरी परिस्थितियों के विकास को बेहतर ढंग से समझ सकें और महसूस कर सकें।
दूसरी छमाही में वह सब और अधिक प्रभावी हो जाता है जिस पर हम अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। यदि हम अपने भय एवं दुख पर ध्यान देंगे, तो हम देख सकते हैं कि उनके प्रभाव का विस्तार हमारे आसपास बढ़ता जा रहा है। यदि ध्यान व्यावहारिक कार्यों पर केंद्रित होगा, तो उनके सर्वोत्तम समाधान के लिए नए अवसर हमारे सामने खुलेंगे। इसलिए इस समय आप जो भी करें—हमारा सचेत ग्रहण प्रश्न की सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।