पूर्णिमा कल सुबह 10.55 बजे कीव समय (7.55 जीएमटी) पर होगी। यह कुंभ-सिंह के अक्ष पर 17 डिग्री पर घटित होगी।
पूर्णिमा कुंभ-सिंह के अक्ष पर स्वतंत्रता के विषय पर जोर देती है। समाज में जैसा चाहें वैसा अभिव्यक्त न कर पाने की अस्वतंत्रता स्वयं के प्रति लगाई गई आंतरिक मनाही का प्रतिबिंब है। मगर इस समय हम आंतरिक एवं बाह्य दोनों प्रकार की मनाहियों के दबाव को बहुत तीव्रता से महसूस करते हैं। हम उन सीमाओं से निराश हो सकते हैं जिनमें हम जी रहे हैं या जी रहे थे, क्योंकि वे हमें समस्याओं से तो बचाती नहीं हैं और जीवन को सुखद भी नहीं बनातीं, जैसा हमने कभी सोचा था। वे बस हमें अपने भयों का सामना करने से रोकती हैं। यह निराशा उन अवसरों के क्षय के रूप में भी प्रकट हो सकती है, जैसे कि आप संभावनाओं एवं इच्छाओं के कोलाहल में फंस गए हों।
ये अनुभव आपको यह समझने में मदद कर सकते हैं कि क्या बदलना या तोड़ना आवश्यक है, ताकि आप सब कुछ नष्ट करना शुरू न कर दें। संभावनाओं की सीमितता की अनुभूति सबसे पहले आगे बढ़ने या नए लक्ष्यों एवं कार्यों की ओर कदम बढ़ाने की तैयारी का संकेत है, जो नवचंद्रमा के दौरान ही निर्मित होंगे। मगर अभी आपको स्वयं को मुक्त करना है या छोड़ना है।
इस अवधि को सर्वाधिक वे लोग अनुभव करेंगे, जिनके कुंडली में यह अक्ष ग्रहों द्वारा विशेष रूप से चिह्नित है। इस प्रकार पूर्णिमा उन विषयों एवं प्रश्नों पर प्रकाश डालती है जो वर्तमान में हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं तथा कार्यवाही की आवश्यकता पर बल देती है।
पूर्णिमा काल बहुत भावुक हो सकता है। हम स्वयं अपने मनोदशा के अचानक गिरने या चिंता को आसानी से स्पष्ट नहीं कर पाते। मगर अपने भावों को जीने से न डरें, मगर अपनी प्रतिक्रियाओं को विध्वंसकारी न बनने दें। इस काल में स्वयं को संयम, धैर्य एवं कार्यप्रणाली में कमी महसूस हो सकती है, मगर तैयार रहें कि आपके आसपास के लोग भी इसी प्रकार की अनुभूतियों से गुजर रहे होंगे। इसलिए सावधान रहें तथा महत्वपूर्ण प्रश्नों की जाँच करें।
फिलहाल बुध, शनि, नेप्चून एवं प्लूटो अभी भी पश्चगामी हैं। इसलिए हम अपने जीवन में पुराने विचारों या घटनाओं की वापसी को देख सकते हैं। इस समय का उपयोग उन संभावनाओं को आजमाने में करें जिन्हें आपने पहले अनदेखा कर दिया था या स्वयं में साहस नहीं जुटा पाए थे।
यह पूर्णिमा बहुत शक्तिशाली है क्योंकि सूर्य अपने ही राशि में गतिमान है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी शक्ति या दुर्बलता का अनुभव कर सकता है। उत्तरार्द्ध उन विषयों की ओर संकेत करता है जिनमें हमने अपनी शक्ति नहीं पाई—और वह शक्ति दूसरों की क्षमताओं एवं संभावनाओं से बहुत भिन्न हो सकती है। इसलिए इस दिन स्वयं को कार्य एवं वार्तालाप में अत्यधिक न झोंकें। बाहरी परिवर्तनों के घेरे में स्वयं की निजी शांति को ढूंढें—वहीं वह स्थान है जो आपका आधार है तथा जहाँ से सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है।
हमारे विकासकारी परिवर्तनों की कामना!