पहली छमाही हल्की गति से शुरू होती है। इस समय अपने चारों ओर जो कुछ भी है, उससे प्रेरणा लें। स्वयं भी अपने आसपास खुशियाँ बाँटें। क्योंकि इस समय जितना आप देते हैं, उतनी ही अधिक संभावनाएँ आपके भीतर नए को ग्रहण करने के लिए खुलती हैं। इस प्रकार बाहरी जगत के साथ हमारी अंतःक्रिया ही हमारे अनुभवों की सुविधा और परिस्थितियों की अनुकूलता को निर्धारित करती है। हमारी इच्छाएँ उतनी ही पूरी होती हैं, जितना हम स्वयं उन्हें साकार करने की अनुमति देते हैं और जब वे दूसरों के लिए सुरक्षित होती हैं।
परंतु यदि हम देने और बाँटने के लिए तैयार नहीं हैं, तो हम शिकायतों और असंतोष में फँस सकते हैं। आदर्श की अपेक्षा हमें स्वयं को उसके बराबर करने की आवश्यकता है। यदि हम अपनी इच्छाओं के साथ सामंजस्य में हैं, तो ऐसा लगता है मानो हम जीवन के प्रवाह में आ गए हैं, जहाँ सभी परिस्थितियाँ सर्वोत्तम रूप से व्यवस्थित होती हैं और इच्छाएँ हमारी अपेक्षाओं से कहीं अधिक व्यापक रूप से पूरी होती हैं।
दूसरी छमाही धीरे-धीरे दिन की पहली घटनाओं को आगे बढ़ाती है। यदि आपने कोई कार्य आरंभ किया है, तो उसे बीच में मत छोड़िए, चाहे ऐसा लगे कि कार्य आगे नहीं बढ़ रहा। आज हमारे पास बहुत मजबूत रचनात्मक संभावनाएँ हैं, इसलिए वर्तमान चुनौतियों के नए/रोचक समाधान तलाशने पर ध्यान दें। हम अतीत की स्थितियों की पुनरावृत्ति देख सकते हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों और उनमें हमारी भूमिका की सूक्ष्मताओं को उजागर करेगी। स्वयं के प्रति अत्यधिक आलोचनात्मक न हों, परंतु भविष्य में कार्यवाही के लिए उपयोगी निष्कर्ष अवश्य निकालें।