12 अंश सूर्य कन्या।
ग्रह किस अंश पर है, यह केवल गणना में दिखता है: अपने ग्रहों के अंश मिनट तक की सटीकता से देखें हर ग्रह की राशि और भवन के साथ।
ग्रह: शनि
भाव: 1-12 भाव
शनि का 12वाँ अंश (कन्या राशि):
ईर्ष्या, महत्वाकांक्षा, गुप्त शत्रु। वृद्धावस्था में आत्म-समीक्षा, पीड़ा, Gewissensbisse (अन्तःकरण के दोष), व्यर्थ गंवाई गई प्रतिभाओं का पश्चात्ताप। संभवतः आत्महत्या। सर्वोत्तम स्थिति में — एकान्तवास, आध्यात्मिक मार्ग (पी. ग्लोबा)।
कायरता, विचारशीलता, प्रयास, व्यापारिक प्रतिभा। बुध का अंश (याकोव केफेर)।
“गुप्त ब्रह्म समाज के मंदिर में पुनः अभिषिक्त किया जाता है, परीक्षित किया जाता है, उनके चरित्र की जाँच होती है।” — निरंतर समूह की माँग उत्पन्न होती है, जिसमें व्यक्ति स्वयं को प्रदर्शित करना चाहता है तथा अपने दायित्वों को प्रभावी ढंग से पूरा करने एवं उत्तरदायित्व ग्रहण करने की क्षमता सिद्ध करनी होती है। योग्यता (डेन राडियर)।
“मध्यम”। तुच्छता का संकेत, जो दुर्लभ ही साधारणता से ऊपर उठ पाता है। यदि सफलता मिलती है, तो वह अधिकतर कुंडली के अन्य कारकों के कारण होती है, न कि इस अंश के। असाधारण प्रतिभाएँ — जो वर्तमान वास्तविकता में प्रयोग नहीं हो पातीं (बोरिस इस्राएल)।
ईर्ष्या गुप्त शत्रुओं को जन्म देती है, मुख्य प्रेरक — महत्वाकांक्षा; वृद्धावस्था में पश्चात्ताप (ओलेग त्रोयानोवस्की)।
शनि का 12वाँ अंश (कन्या राशि):
ईर्ष्या, महत्वाकांक्षा, गुप्त शत्रु। हीनभावना, अत्यधिक संवेदनशीलता, छोटी-छोटी बातों पर स्वयं को दोषी ठहराना। वृद्धावस्था में आत्म-ज्ञान, आत्म-समीक्षा, पीड़ा, Gewissensbisse (अन्तःकरण के दोष), व्यर्थ गंवाई गई प्रतिभाओं का पश्चात्ताप।
यदि सिंह, वृषभ अथवा धनु राशि अत्यधिक प्रभावित हों — संभवतः गुप्त धन। उत्तम कोष्ठक में — प्रेम में सफलता, स्वयं के प्रति कठोरता। अशुभ कोष्ठक में — हत्या की संभावना। भय, जीवन का भय, कल्पनाएँ। सर्वोत्तम स्थिति में — एकान्तवास, आध्यात्मिक मार्ग (टेबोइयन कैलेंडर)।
ग्रह: बुध
भाव: 1-12 भाव
बुध का 12वाँ अंश (कन्या राशि):
“लेखक, सिर पर हाथ रखे, मेज के सामने बैठा है; उसके सामने — संपादक द्वारा अस्वीकार किया गया पांडुलिपि तथा एक स्त्री की तस्वीर।” — यह अंश साहित्यिक अथवा कलात्मक प्रतिभा वाले व्यक्ति को सूचित करता है, जो प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त करेगा, किंतु प्रेम के आकर्षण के सामने स्वयं को रोक पाने में असमर्थ रहेगा। ऐसा व्यक्ति ऐसी स्थिति में हो सकता है, जहाँ उसे दो प्रेमियों में से एक को चुनना होगा, दोनों ही समान ध्यान एवं प्रेम की माँग करते हैं। यह द्वंद्व का प्रतीक है (इवान कोस्मिन्स्की)।





