17 कुम्भ भाव में चंद्रमा।
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गरिमाएँ: मारण, वक्री, मार्गी, पेरेग्रीन
भाव: 12 भाव
ग्रह दशाएँ:
– चंद्रमा: 17° कुम्भ
– कुम्भ: 17°
विशेष लक्षण:
– अतिरिक्तता का भाव
– प्रयासों की निरर्थकता
– कारावास, निर्वासन, बंदी (पी. ग्लोबा)
– स्वतंत्रता की सीमाएँ, बंधन का प्रभाव
– रंगों का बोध (याकोव केफेर)
– चित्रकला का प्रभाव; संगठनों में प्रभाव (निसन डीवोर)
– “तलवार” और “मशाल” के बीच प्रतीकात्मक युद्ध — अतीत पर निर्भरता से मुक्ति; जो व्यक्ति आगे बढ़ता है, वह योद्धा बन जाता है, पुनः शाश्वत ‘महायुद्ध’ में प्रवेश करता है
– मूल्यों का ध्रुवीकरण
– शक्ति एवं प्रकाश, भौतिक इच्छाओं एवं उच्च आकांक्षाओं के मध्य संघर्ष
– आत्म-अभिमुखीकरण
– दिव्य उत्साह (डेन राड्यार)
– “स्वयं-आत्मविश्वासी” — व्यक्ति जो निरर्थक रूप से स्वयं को सदैव सही मानता है
– मूल व्यक्तित्व, जो अपने समस्त वातावरण को प्रभावित करता है
– पुरुषों की कुंडली में यह भाव अधिक प्रबल होता है
– वक्ताओं एवं पत्रकारों का भाव (बोरिस इज़रायेल)
– निरर्थक प्रयास, निर्वासन अथवा बंदी (ओलेग ट्रोयानोवस्की)
– लिलिथ (काला चंद्र) का पतन, प्रवास
– अतिरिक्तता का भाव
– जीवनशैली के कारण कारावास का संकेत देने वाले भावों में से एक
– ऊर्जा का निरर्थक व्यय
– यदि पुरुष कुंडली में स्त्री राशियाँ प्रबल हों तथा ग्रहों से पीड़ित हों, अथवा स्त्रियों में पुरुष राशियाँ हों, तो यह भाव समलैंगिकता का संकेत दे सकता है (टेबोइयन कैलेंडर)
– ग्रह: बुध
– “महासागर के ऊपर उड़ता हुआ чайка” — मुक्त आत्मा, आध्यात्मिक, साहसी, अशांत एवं दैनिक दिनचर्या के प्रति अनुकूल न होने वाला व्यक्ति
– प्रारंभिक बाल्यावस्था में इसकी देखभाल अत्यंत आवश्यक
– ऐसा व्यक्ति यायावर स्वभाव का होता है तथा बार-बार परिवर्तन इसकी प्रकृति है
– यह प्रवास का प्रतीक है (इगोर कोस्मिन्स्की)




