30 कन्या का प्लूटो ग्रह।
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राजसी ग्रह। दृढ़ चरित्र। बाधाओं पर विजय। शानदार स्थिति। प्रेम एवं मित्रों में सफलता। ये वे व्यक्ति होते हैं जो एक असाधारण मनोविज्ञान वाले अतिरिक्त संवेदी होते हैं (पी. ग्लोबा)।
गौरव, आत्मविश्वास, उन्नति, महान आशाएं। बृहस्पति ग्रह (जे. केफर)।
“प्राचीन काल की अत्यंत प्राचीन संस्कृति के गहन मूल से उत्पन्न एक आध्यात्मिक भाईचारा, जिसमें व्यक्तिगत बुद्धियां एकीकृत होकर एक चमकदार चेतना के प्रकाश में विलीन हो जाती हैं, वह व्यक्ति के सामने प्रकट होता है जिसने रूपांतरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।”
– खुले मन एवं आत्म-उन्नति की गहरी भावना रखने वाले व्यक्ति उच्च अस्तित्व के रूपों के साथ संपर्क स्थापित कर सकते हैं। सचेतन अस्तित्व की एकता। आत्मा को ताज़गी देने वाली आंतरिक काव्यात्मकता। हृदयों को प्रकाशित करने वाली आध्यात्मिक भावनाएं। भूतकाल की आवाजें (डी. राडियर)।
“प्रखरता”। यह उन व्यक्तियों की ओर संकेत करता है जिन्हें विचित्र घटनाओं की श्रृंखला के कारण अथवा समाज की सेवा अथवा मनोरंजन में योगदान देने के परिणामस्वरूप ध्यान आकर्षित करना होता है। टेलीविजन प्रस्तोता, अंतरिक्ष यात्री अथवा विवादास्पद न्यायिक मामलों के प्रतिभागी (बी. इस्राएल)।
शक्ति पूर्ण चरित्र, शानदार स्थिति तक पहुंचना, प्रशासनिक करियर (ट्रोयानोव्स्की)।
प्लूटो ग्रह। राजसी। दृढ़ चरित्र, बाधाओं पर विजय। शानदार स्थिति। नए कार्यों एवं साहसिक प्रयासों में सफलता। मित्रों, संरक्षकों एवं प्रेम में सौभाग्य। विशेष रूप से तब जब व्यक्ति अन्तर्ज्ञान का अनुसरण करता है। प्रायः यह ग्रह अतिरिक्त संवेदी व्यक्तियों, असाधारण मनोविज्ञान वाले लोगों अथवा असाधारण गुणों एवं क्षमताओं वाले व्यक्तियों की कुंडलियों में दृष्टिगोचर होता है जो अन्य आयामों में निवास करते हैं (टेबोइयन कालेंद्र)।
शनि ग्रह। “नीले शाम आकाश में एक विशाल पहिये के रूप में प्रकाश की तरंगित धाराएं दिखाई देती हैं।”
– यह एक संयमित एवं विवेकपूर्ण व्यक्ति की ओर संकेत करता है जिसमें गूढ़ विज्ञानों की ओर प्राकृतिक झुकाव होता है। वह पारंपरिक विचारों का अनुसरण करने से इंकार करता है तथा सतही विचारों से प्रभावित जनसमूह के पीछे चलने से भी बचता है। सामान्यतः उसका जीवन सफल रहता है। वह थोड़ा धीमा होता है किंतु उसके मन में वास्तविक सहानुभूति होती है जो उसके विवेक के साथ मिलकर कार्य करती है। जैसे-जैसे वह विकसित होता है, उसकी आध्यात्मिक दृष्टि खुलने लगती है तथा उसे ऐसी बातों का बोध होता है जिन्हें वह पहले केवल सन्देह के साथ स्वीकार करता था। जीवन के अंतिम चरण में उसके लिए सच्चे ज्ञान के द्वार खुल जाते हैं। यह नियंत्रण का प्रतीक है (आई. कोस्मिन्स्की)।





