9 ग्रह बृहस्पति तथा धनु।
ग्रह किस अंश पर है, यह केवल गणना में दिखता है: अपने ग्रहों के अंश मिनट तक की सटीकता से देखें हर ग्रह की राशि और भवन के साथ।
अग्रेसिवता, प्रतिस्पर्धा की भावना। हिंसक मृत्यु का खतरा (पी.ग्लोबा)।
इच्छाशक्ति, आक्रामकता, युद्ध में खतरा। ग्रह बुध (यां.केफेर)।
“तीन ‘पुराने गुरु’ जो एक चित्र दीर्घा की विशेष कक्ष में दीवार पर लटके हुए हैं” —
अराजक समाज में नए मूल्यों की खोज के दौरान भ्रमित खोजों में स्रोत पर लौटने की आवश्यकता। प्रेषितों की निरंतरता। मनुष्य की “तीन आत्माओं” — बुद्धि, भावनाओं तथा अंतर्ज्ञान — का विश्वसनीय संयोग।
“बंद” — भावनाओं के दमन तथा कुंठा के प्रभाव में चरम कृत्यों की संभावना सहित बंद रहने की प्रवृत्ति तथा संभावना। यह ग्रह अक्सर क्षमताओं के विकास को सीमित करता है (बी.इज़राइल)।
हिंसक मृत्यु का खतरा (ओ.ट्रोयानोवस्की)।
ग्रह बृहस्पति। “लाठी लिए व्यक्ति”।
प्रवास का ग्रह। आक्रामकता, प्रतिस्पर्धा की भावना, द्वंद्व, धमकियाँ। परीक्षण, पीड़ा, निराशा, बंद रहने की प्रवृत्ति, दुर्बल चरित्र, किंतु बुद्धि, भावनाओं तथा अंतर्ज्ञान का संयोग (अच्छे पालन-पोषण में)। ताऊ-वर्ग या क्रॉस स्थिति तथा अग्नि राशियों के प्रबल होने पर हिंसक मृत्यु, आपदाओं का खतरा (टेबोइचनी कालेंद्र)।
ग्रह बृहस्पति। “महान तराजू। उनके पीछे दो विवाद करते हुए” —
इस ग्रह वाले व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रियाओं तथा वाद-विवादों से बचना चाहिए। वह दुष्चक्र जो इस व्यक्ति को नियति के मार्ग में धकेलता है तथा गुलामी के समान निर्भरता में रखता है, उसके लिए असंतुलन है। इस व्यक्ति को आत्मा की पूरी शक्ति से प्रतीक में निहित तराजू को संतुलन में रखने का प्रयास करना चाहिए तथा ऐसी कोई भी बात नहीं करनी चाहिए जिससे उसकी शांति भंग हो सके। यह है द्विधा की स्थिति (आई.कॉस्मिन्स्की)।





