पूर्णिमा कल 14:36 बजे कीव समय (17:36 जीएमटी) होगी। यह 7 अंश पर वॉटर-मैन-लायन अक्ष पर घटित होगी।
वॉटर-मैन-लायन अक्ष पर पूर्णिमा स्वतंत्रता के विषय पर जोर देती है। समाज में अपनी इच्छानुसार अभिव्यक्त होने की असमर्थता आंतरिक स्वयं होने की मनाही का प्रतिबिंब है। किंतु इस समय हम आंतरिक एवं बाह्य दोनों प्रकार की मनाहियों के दबाव को तीव्रता से महसूस करते हैं। हम उन सीमाओं से निराश हो सकते हैं जिनमें हम जी रहे हैं अथवा जिनमें अभी जी रहे हैं, क्योंकि वे हमें समस्याओं से नहीं बचातीं और न ही जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाती हैं, जैसा हमने सोच रखा था। वे तो बस हमें अपने भयों का सामना करने से रोकती हैं। यह निराशा संभवतः अवसरों की समाप्ति के रूप में भी प्रकट हो सकती है, मानो आप संभावनाओं एवं इच्छाओं के किसी ऐसे गतिरोध में फँसे हों जहाँ से निकलने का रास्ता नहीं सूझ रहा।
ये अनुभव आपको यह समझने में मदद कर सकते हैं कि किन चीज़ों को बदलना अथवा यहाँ तक कि नष्ट करना आवश्यक है, ताकि आप सब कुछ चारों ओर नष्ट करने की ओर न बढ़ जाएँ। संभावनाओं की सीमितता की अनुभूति सर्वप्रथम आगे बढ़ने अथवा नई दिशाओं एवं लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ाने की तैयारी का संकेत है, जो सोलर एक्लिप्स (12 अगस्त) तक निर्मित होंगे। और अभी आपको उन बंधनों को छोड़ देना चाहिए अथवा मुक्त कर देना चाहिए जो आपके विकास में बाधक हैं।
इस अवधि को सर्वाधिक वे लोग अनुभव करेंगे जिनके कुंडली में यह अक्ष ग्रहों द्वारा चिह्नित है। इस प्रकार पूर्णिमा उन विषयों एवं प्रश्नों पर प्रकाश डालती है जो वर्तमान में हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं तथा कार्यवाही की आवश्यकता पर बल देती है।
इस पूर्णिमा में बृहस्पति सूर्य के सटीक संयोजन में है, अतः वह सूर्य को अपनी शक्ति प्रदान करता है। इसलिए इस समय न्याय एवं विकास संबंधी हमारा दृष्टिकोण अत्यधिक व्यक्तिपरक हो जाता है। अतः इस समय समूह स्तर पर लिए गए निर्णय एकतरफा एवं अल्प प्रभावी होंगे।
दूसरी ओर, चंद्रमा प्लूटो के संयोजन में है, जो हमारे भीतर व्यक्तिगत लाभ एवं समाज में मान्यता प्राप्त करने की इच्छा के मध्य विरोधाभास को तीव्र करेगा। किंतु अभी अपने लिए एकमात्र सही निर्णय खोजने का प्रयास न करें; इस चरण में महत्वपूर्ण है कि आप इन संघर्षपूर्ण प्रश्नों को देखें। और ग्रहणों के मार्ग में परिवर्तन लाकर स्वयं के भीतर एवं बाह्य अभिव्यक्ति में इस तनाव को रूपांतरित करने का प्रयास करें।
पूर्णिमा का समय अत्यधिक भावनात्मक हो सकता है। हम स्वयं अपने अप्रत्याशित मनोदशा पतन अथवा चिंता को स्पष्ट नहीं कर पाएँगे। किंतु अपने भावों को जीने से न डरें, किंतु अपनी प्रतिक्रियाओं को विनाशकारी न बनने दें। इस अवधि में आपको स्वयं संयम, धैर्य एवं कार्यप्रणाली में कमी महसूस हो सकती है, किंतु तैयार रहें कि आपके आस-पास के लोग भी इसी प्रकार की अनुभूतियाँ कर रहे होंगे। अतः महत्वपूर्ण प्रश्नों की सावधानीपूर्वक जाँच करें।
यह पूर्णिमा अत्यंत शक्तिशाली है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी शक्ति अथवा दुर्बलता का अनुभव कर सकता है। उत्तरार्द्ध उन विषयों की ओर संकेत करता है जिनमें हमने अपनी शक्ति नहीं पाई है—और वह शक्ति दूसरों की क्षमताओं एवं संभावनाओं से सर्वथा भिन्न हो सकती है। अतः इस दिन स्वयं को कार्य एवं संवाद के बोझ से न थकाएँ। बाह्य परिवर्तनों के घमासान में स्वयं की शांति को खोजें—वह स्थान आपका आधार है जहाँ से सब कुछ स्पष्ट एवं बोधगम्य दिखाई देता है।
हमारे विकासकारी परिवर्तनों की कामना!