ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना एक प्रतीक होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ये प्रतीक क्या दर्शाते हैं? ये विशिष्ट प्रतीक किस प्रकार ग्रह विशेष से जुड़े हैं और इस तरह क्यों चित्रित किए गए हैं?
ग्रहों के प्रतीकों के निर्माण में तीन मुख्य तत्व प्रयुक्त होते हैं: वृत्त, चाप और क्रॉस, तथा दो अतिरिक्त तत्व – बिंदु और तीर।
- वृत्त – आत्मा, चेतना का प्रतीक है।
- चाप – आत्मा, संवेदनशीलता का प्रतीक है।
- क्रॉस – शरीर, पदार्थ का प्रतीक है।
सूर्य को वृत्त के भीतर स्थित बिंदु द्वारा दर्शाया जाता है – आत्मा, जिसका केंद्र स्वयं की चेतना, व्यक्तिगत चेतना है।
चंद्रमा को चाप द्वारा दर्शाया जाता है – आत्मा, भावनाएँ, संवेदनशीलता।
बुध के प्रतीक में तीनों मुख्य तत्वों का प्रयोग होता है। इसमें चाप सबसे ऊपर स्थित होता है, जो संवेदनशीलता की प्रधानता को दर्शाता है। वृत्त, क्रॉस पर हावी रहता है। चाप और वृत्त का संयोजन मानसिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो पदार्थ पर हावी रहती है।
शुक्र के प्रतीक में वृत्त और क्रॉस होते हैं। इसमें आत्मिक (वृत्त) पदार्थ (क्रॉस) पर हावी रहता है, जो प्रेरणा को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है।
मंगल का प्रतीक वृत्त और तीर से निर्मित होता है। इसका अर्थ है निर्देशित आत्मा। किंतु तीर सीधे ऊपर की ओर निर्देशित नहीं होता। इसका अर्थ उच्चतर की ओर आकांक्षा नहीं, अपितु प्राप्ति की इच्छा है।
बृहस्पति का प्रतीक चाप और क्रॉस से निर्मित होता है – आत्मा (चाप) पदार्थ (क्रॉस) पर हावी रहता है। बृहस्पति का सार दया है।
शनि के प्रतीक में इसके विपरीत भौतिक (क्रॉस) आत्मिक (चाप) पर हावी रहता है।
यूरेनस का प्रतीक वृत्त, केंद्र में स्थित बिंदु तथा ऊपर की ओर निर्देशित तीर से निर्मित होता है। सूर्य की तरह वृत्त के भीतर स्थित बिंदु यह दर्शाता है कि यूरेनस भी व्यक्तिगत चेतना का प्रतीक है। ऊपर की ओर निर्देशित तीर अंतरिक्षीय चेतना, व्यक्तिगत चेतना की ओर संकेत करता है।
नेपच्यून उच्चतर सप्तक का चंद्रमा है। इसके प्रतीक में चाप और क्रॉस का प्रयोग होता है। किंतु चाप, यूरेनस की तरह पूर्ण रूप से क्रॉस पर हावी नहीं होता, अपितु आंशिक रूप से प्रभावी रहता है तथा साथ ही भौतिक के साथ संयुक्त रहता है। यह दर्शाता है कि नेपच्यून में जुपिटर की अपेक्षा पृथ्वी के कष्टों में अधिक भागीदारी है, करुणा ऊपर से नहीं उतरती, अपितु समान पीड़ितों के साथ सहानुभूति एवं भागीदारी है।
प्लूटो के प्रतीक में भी बुध की तरह तीनों मुख्य तत्वों का प्रयोग होता है। प्लूटो उच्चतर सप्तक का बुध है। इसमें तत्वों का क्रम प्राकृतिक व्यवस्था को दर्शाता है: आत्मा, आत्मा से ऊपर तथा दोनों भौतिक से उच्चतर। ऐसा क्रम रखने वाला प्लूटो एकमात्र ग्रह है। यही कारण है कि प्लूटो मेष राशि का स्वामी है तथा राशिचक्र का प्रारंभिक स्वामी है।
कीरोन का प्रतीक एक ऐसा चाबी है जो भौतिक और आध्यात्मिक को जोड़ता है। ऊपर और नीचे जाती दो रेखाएँ ‘गोर्नम’ और ‘दोल्नम’ दोनों लोकों में जीवन को दर्शाती हैं, जो एक ही आत्मिक सिद्धांत (आधार में स्थित वृत्त) से जुड़ा है।
प्रोसेर्पाइन का प्रतीक दो विपरीत दिशाओं में निर्देशित अर्धवृत्तों अथवा गोल कोष्ठकों (आत्मा) अथवा वर्ग कोष्ठकों ], के मध्य स्थित बिंदु है – गर्भ में स्थित बीज। साथ ही यह प्रतीक माता के गर्भ से जन्म लेने वाले शिशु का भी है। यह पुनर्जन्म का प्रतीक है।





