बृहस्पति-विरोध चंद्रमा
(ट्रांज़िट: बृहस्पति → जन्म कुंडली चंद्रमा)
म्यूनिख पैराप्साइकोलॉजी संस्थान का अध्ययन पाठ्यक्रम। ट्रांज़िट
स्वभाव: – इस असंगत ट्रांज़िट के दौरान बृहस्पति के प्रभाव में व्यक्ति वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण बनाए रखने में कठिनाई अनुभव करता है। वह अपनी क्षमताओं का अतिरंजित मूल्यांकन करता है और भाग्य के सहारे पर भरोसा करता है (जो दुर्भाग्य से उपलब्ध नहीं होता)। विशेष रूप से भावनात्मक रूप से अस्थिर व्यक्तियों में आवेग और अत्यधिक भावुकता उत्पन्न होती है, जिसके परिणाम अत्यंत नकारात्मक हो सकते हैं। वे किसी व्यक्ति या कार्य में शीघ्र उत्साहित होते हैं, किंतु शीघ्र ही उसमें रुचि खो बैठते हैं।
साझेदारी/प्रेम एवं विवाह: – चूँकि इस ट्रांज़िट के दौरान अनुचित व्यवहार की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है और व्यक्ति स्थिति का सही आकलन नहीं कर पाता, अतः साथियों के मध्य संबंधों का विकास उनकी परिपक्वता और स्थिति के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन पर निर्भर करता है। इस अवधि में उत्पन्न “आग” क्षणिक होती है। जो भी संयुक्त प्रयास साथी करते हैं, वे प्रायः असंगत परिणाम देते हैं।
कार्य एवं व्यावसायिक संपर्क: – अत्यधिक महत्वाकांक्षी योजनाएँ और अतिशय लक्ष्योन्मुखता अपेक्षित विस्तार के स्थान पर हानि ही उत्पन्न करती हैं। ये ट्रांज़िट व्यक्ति के आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार लाने के प्रयासों के लिए प्रतिकूल काल होता है। विदेश यात्राओं एवं विदेशी व्यावसायिक संपर्कों से भी अप्रिय अनुभव प्राप्त हो सकते हैं। अध्ययन कार्य बाधित होता है, क्योंकि व्यक्ति हल्के-फुल्के मन से कार्य करता है अथवा विपरीत लिंग के व्यक्तियों के प्रति आकर्षित रहता है।
कोण का नाम नहीं, बल्कि विशिष्ट चार्ट में डिग्री और ऑर्ब के अनुसार पढ़ा जाता है: अपनी जन्म कुंडली की गणना करें और अपनी प्रतियुति (अपोज़िशन) देखें सटीक ऑर्ब्स और सभी पहलुओं की पूरी सूची के साथ।
आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र: – किसी समझौते के माध्यम से हानि उठाने का जोखिम उत्पन्न होता है। जीवन स्थितियों में परिवर्तन भी केवल भौतिक हानि ही उत्पन्न करता है। इस प्रकार के समझौते करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे मामलों में विधि विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य: – उत्साह के पश्चात उत्पन्न निराशा “पेट पर” प्रभाव डालती है। मानसिक भार के कारण अंतःस्रावी प्रणाली भी असंतुलित हो जाती है।
विशेषताएँ: यदि जन्म कुंडली में बृहस्पति अनुकूल स्थिति में हो, तो उसके असंगत ट्रांज़िट का प्रभाव इतना तीव्र नहीं होता। किंतु जन्म कुंडली में प्रतिकूल स्थिति होने पर यह नकारात्मक प्रभाव और भी प्रबल हो सकता है।
ट्रांज़िट – व्यवसाय
यह पहलू बारह वर्ष में केवल एक बार उत्पन्न होता है, अतः इसे अत्यंत गंभीरता से लेना चाहिए। यह काल स्वयं की इच्छाओं पर अत्यधिक निर्भर रहने और अनावश्यक व्यय करने का काल होता है। अत्यधिक आशावाद, पूर्वाग्रह, अंधविश्वास, वैचारिक असहमति तथा बिना सोचे-समझे किए गए वायदे इस काल की असफलताओं के प्रमुख कारण होते हैं। अपने कर्तव्यों की उपेक्षा, अत्यधिक भोजन एवं मदिरापान से अतिरिक्त समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। दूरस्थ यात्राओं, व्यापारिक वार्ताओं, विदेशी फर्मों के साथ व्यवहार तथा प्रायोजकों के साथ संबंधों में असफलता प्राप्त हो सकती है। कानूनी अथवा सरकारी अधिकारियों के साथ विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। इस काल में आप दूरदर्शिता खो देते हैं और गलत कदम उठा सकते हैं, जिससे आगे चलकर हानि उठानी पड़ सकती है। विशेष रूप से अचल संपत्ति, खाद्य पदार्थों एवं सेवा क्षेत्र से संबंधित समझौते अत्यंत प्रतिकूल होते हैं।
ट्रांज़िट – स्वास्थ्य
इस ट्रांज़िट की अवधि (दस दिन से दो माह) में आप अतिरिक्त भार बढ़ाने का जोखिम उठाते हैं। भावनात्मक उद्वेग आपकी मनोवृत्ति एवं तंत्रिका तंत्र पर दबाव डालते हैं। आमाशय संबंधी रोगों एवं यकृत विकारों का बिगड़ना संभव है। इस काल में इन रोगों का उपचार आरंभ करना अथवा किए गए परीक्षणों से वस्तुनिष्ठ परिणाम प्राप्त करना कठिन होता है। अवांछित गर्भधारण अथवा गर्भावस्था संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
ट्रांज़िट – प्रेम एवं परिवार
धार्मिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक दृष्टिकोणों, शैक्षणिक स्तर आदि में अंतर उत्पन्न होने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। पारिवारिक सदस्यों एवं प्रेम संबंधों में मतभेद उत्पन्न होते हैं। आप अत्यधिक आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं, जिससे मूल्यवान संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस काल में आवास परिवर्तन, मरम्मत, संपत्ति संबंधी अथवा घरेलू विषयों, अचल संपत्ति की खरीद, पारिवारिक समारोहों, भ्रमण, मनोरंजन संबंधी गतिविधियों अथवा संयुक्त कार्यक्रमों के लिए यह काल अनुकूल नहीं होता। असफल अथवा विनाशकारी खरीदारी, वित्तीय कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं। आप व्यर्थ के व्यय एवं अपनी इच्छाओं पर अत्यधिक निर्भर रहने की प्रवृत्ति रखते हैं। अवांछित गर्भधारण अथवा गर्भावस्था संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। कामुक संबंधों में भी कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं।





