षष्ठांश सूर्य – चंद्रमा
Het Monster: विपरीत लिंगी मित्रता। उत्तम विवाह। सभी उन्हें प्रेम एवं सम्मान देते हैं। यदि विरोधी दृष्टियाँ नहीं हैं तो उत्तम माता-पिता। उत्तम स्वास्थ्य। सन्तुलन। भाव एवं संकल्प की सामंजस्यता।
कात्रिन ओबये: षष्ठांश सूर्य – चंद्रमा
कोण का नाम नहीं, बल्कि विशिष्ट चार्ट में डिग्री और ऑर्ब के अनुसार पढ़ा जाता है: अपनी जन्म कुंडली की गणना करें और अपने षष्ठांश (सेक्सटाइल) देखें सटीक ऑर्ब्स और सभी पहलुओं की पूरी सूची के साथ।
त्रिकोण, षष्ठांश: सामान्यतः मनोवैज्ञानिक सन्तुलन एवं उत्कृष्ट अनुकूलन क्षमता का सूचक होते हैं। सामंजस्य की ओर उन्मुख व्यक्ति समानता एवं तुल्यता को पहचानने एवं अनुभव करने में सक्षम होता है, किन्तु वह उन विचारों को अस्वीकार कर देता है जो उसके आदर्शों से मेल नहीं खाते। उसकी संवेदनशीलता एवं कल्पनाशक्ति यथार्थबोध के साथ संयुक्त होती है। यदि कुंडली के अन्य विवरण विरोधी न हों तो वह दूसरे व्यक्ति के साथ सामंजस्य स्थापित कर लेता है; यह मिलन एकाकी जीवन अथवा वृहद् समाज की अपेक्षा उसके लिए श्रेयस्कर होता है। वह दृढ़तापूर्वक मानता है कि स्त्री-पुरुष में ऐसा कोई अन्तर नहीं जो उनके पारस्परिक सामंजस्य एवं सुसंगति में बाधक हो सके। वह समाज एवं पारिवारिक जीवन दोनों में सफलता प्राप्त करना चाहता है तथा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहना चाहता। ज्योतिष परम्परा के अनुसार यह दृष्टि व्यक्ति की माता-पिता के मध्य सामंजस्य का सूचक मानी जाती है, किन्तु वर्तमान युग में प्रायः होने वाले विवाह-विच्छेदों के कारण यह धारणा सटीक प्रतीत नहीं होती। वास्तव में, जिन व्यक्तियों की कुंडली में सूर्य-चंद्रमा षष्ठांश होता है, उनके माता-पिता के मध्य होने वाले झगड़ों को भी वे सामंजस्य स्थापित करने का एक अतिरिक्त अवसर मानते हैं तथा इस विश्वास को दृढ़ करते हैं।
ए. पोडवोड्नी: षष्ठांश सूर्य – चंद्रमा
षष्ठांश सूर्य: प्रायः अशुद्ध चयन को हल्केपन अथवा भूल का परिणाम न मानकर अपने परमात्मा के प्रति विश्वासघात समझा जाना चाहिए। षष्ठांश सूर्य व्यक्ति को ग्रह द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में संभावनाएँ प्रदान करता है, जिनके साकार होने के लिए व्यक्ति को स्वयं के संकल्प एवं प्रयास की आवश्यकता होती है। संभवतः उसे कठोर किन्तु अनुकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, जो उसकी सहायता के लिए होंगी। षष्ठांश सूर्य व्यक्ति के सम्मुख पुरुषार्थ की चुनौती रखता है तथा उसकी इच्छाशक्ति एवं सामर्थ्य का परीक्षण करता है। यदि व्यक्ति इस चुनौती को स्वीकार करने में असमर्थ होता है, तो बार-बार प्रस्तुत होने वाले ऐसे अवसर उसके विरुद्ध कार्य करने लगते हैं तथा वह स्वयं को कठोर कर्मफलों में फँसा पाता है, जहाँ उसका विकल्प अत्यल्प अथवा अनुपलब्ध होता है। दूसरी ओर, षष्ठांश सूर्य व्यक्ति को अपनी संकल्पशक्ति को सुदृढ़ करने तथा ग्रह से सम्बन्धित रचनात्मक कार्यों में स्वयं को स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। आंतरिक समस्याओं का समाधान करते हुए व्यक्ति स्वयं के संकल्प को सही दिशा देने तथा अपने उद्देश्यों को स्पष्ट करने में सक्षम होता है। उदाहरणार्थ, सूर्य-चंद्रमा षष्ठांश एक अत्यन्त सम्भावनापूर्ण दृष्टि है, जो शारीरिक एवं आध्यात्मिक विकास के व्यापक अवसर प्रदान करती है। उच्च स्तर पर यह दृष्टि आध्यात्मिक गुरुओं में पायी जाती है, जो उच्च एवं निम्न सिद्धान्तों के मध्य सामंजस्य स्थापित करने तथा व्यक्ति को उसके विकास पथ पर अग्रसर करने में पूर्णतः सक्षम होते हैं।
षष्ठांश चंद्रमा: व्यक्ति अपनी आलस्य पर विजय प्राप्त कर समाज के विकास को गति प्रदान करता है। यह दृष्टि ग्रह द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में अवचेतन विकास के व्यापक अवसर प्रदान करती है। उदाहरणार्थ, चंद्रमा-मंगल षष्ठांश वाले व्यक्ति को जीवन में अनेक अवसर प्राप्त होते हैं, जहाँ वे शारीरिक बल एवं चपलता में वृद्धि कर सकते हैं (खिलाड़ी का लक्षण) अथवा ऐसे कार्यों में दक्षता प्राप्त कर सकते हैं जिनमें अवचेतन मन की प्रमुख भूमिका होती है (जैसे सुस्पष्ट प्रतिवर्तों का निर्माण)। यह दृष्टि आध्यात्मिक विकास के व्यापक अवसर भी प्रदान करती है, क्योंकि यह अवचेतन मन के निम्न कार्यक्रमों को उच्च कंपनों में परिवर्तित कर व्यक्ति के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। उदाहरणार्थ, चंद्रमा-शुक्र षष्ठांश वाले व्यक्ति को प्रेम एवं कला के प्रति निष्क्रिय उपभोग की प्रवृत्ति से सक्रिय सृजनात्मकता की ओर अग्रसर होने का अवसर मिलता है। व्यक्ति न केवल दूसरों के प्रति प्रेमानुभूति रखने तक सीमित रहता है, अपितु अपनी प्रेमभावना द्वारा दूसरों को नवीन रूप प्रदान करने में भी सक्षम हो सकता है। इसी प्रकार कला के क्षेत्र में भी व्यक्ति केवल कला का आनन्द लेने तक सीमित नहीं रहता, अपितु उसे सृजनात्मक कार्यों में भाग लेने तथा संगीत आदि में योगदान देने के अवसर प्राप्त होते हैं। आंतरिक संतुष्टि एवं गहन कला बोध की प्राप्ति होती है। यदि व्यक्ति षष्ठांश चंद्रमा द्वारा प्रदत्त अवसरों की उपेक्षा करता है, तो कालान्तर में उसे जीवन एवं स्वयं के प्रति गहन असन्तोष का सामना करना पड़ता है, जो प्रायः दूसरों पर आरोपित किया जाता है तथा ग्रह द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में तुच्छ स्वार्थपरता को जन्म देता है। इस दृष्टि का सम्यक् उपयोग व्यक्ति के सूक्ष्म सृजनात्मक विकास एवं अवचेतन मन के निम्न कार्यक्रमों के उच्च रूपान्तरण द्वारा उसके आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है।





