आज नवीन खगोलीय वर्ष आरंभ हो रहा है। सूर्य ने प्रातःकाल मेष राशि के प्रथम अंश में प्रवेश किया है। यह खगोलीय पिंड 19 अप्रैल तक इसी राशि में स्थित रहेगा। लोक परंपराओं में इस समय को वसंत विषुव दिवस के रूप में चिह्नित किया जाता है, जब दिन एवं रात की अवधि समान होती है, किंतु इसके पश्चात् दिन की अवधि में वृद्धि प्रारंभ हो जाती है। प्राचीन काल से ही माना जाता रहा है कि इस दिन के पश्चात् वास्तविक वसंत का आरंभ होता है। यह एक संक्षिप्त कालखंड है, जो नवीन ऊर्जाओं के प्रवाह के लिए एक प्रतीकात्मक द्वार के समान है, अतः जीवन की सभी योजनाओं के नवीनिकरण का समय है। अतः हम नवीन सौर सक्रियता के इस प्रवाह को, जो प्रेरणा एवं नवीन शक्तियों के रूप में प्रकट होता है, ग्रहण करें। प्रकृति में वृद्धि एवं विकास की लालसा उत्पन्न होने लगती है। चारों ओर प्रकाश की मात्रा में वृद्धि होती है, वायु गर्म होने लगती है तथा वृक्षों एवं झाड़ियों की कलियों में हरा रंग प्रकट होने लगता है। पवन शीघ्र ही वसंत की सुगंध को चारों ओर फैला देता है, जिससे किसी को भी उदासीन नहीं रखा जा सकता। समस्त सृष्टि, चाहे वह वनस्पति हो अथवा मनुष्य, शीतकालीन ‘मूर्च्छा’ से जागृत होने लगती है। कोमल डंठलों पर प्रथम पुष्प खिलने लगते हैं तथा चहुँओर मुस्कानें बिखरने लगती हैं। मनुष्य प्रेम एवं आनंद के संक्रमण से ग्रसित हो जाते हैं, वसंत की वायु से प्रसन्नता के स्पंदन ग्रहण करते हुए। प्रकृति के साथ-साथ हमारे हृदय एवं आकांक्षाएं भी खिलने लगती हैं। हम दौड़ने, भागने एवं सब कुछ समय पर पूर्ण करने की लालसा रखने लगते हैं। धीरे-धीरे जीवन की गति तीव्र होने लगती है, किंतु इससे जीवन में रोमांच की वृद्धि होती है। वसंत का संगीत हमें जीवन के पुनर्जन्म के नृत्य में सम्मिलित कर लेता है। अपने भीतर सक्रियता के स्पंदनों को ग्रहण करें, ताकि अपने लक्ष्यों के बीजों को समय पर अंकुरित कर सकें तथा सक्रिय कालखंड में उन्हें परिपक्व कर प्रथम फल प्राप्त कर सकें।
जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तब हम सक्रियता की लालसा रखने लगते हैं, किंतु हमें केवल एक प्रेरणा की आवश्यकता होती है। और अब सौर किरणें हमारे भीतर एवं हमारे चारों ओर आवश्यक प्रक्रियाओं को प्रारंभ कर रही हैं। आगे सब कुछ हमारे कर्म पर निर्भर करता है, क्योंकि हमारे परिणाम हमारे प्रयासों का ही प्रतिफल होते हैं। अतः यदि हम चाहें, तो अब से ही विचार करना आरंभ कर सकते हैं कि इसे कैसे किया जाए, तथा अप्रैल के आरंभ से ही अपने द्वारा रचे गए समस्त कार्यों को क्रियान्वित करना आरंभ कर सकते हैं एवं आगे और अधिक। हमारी इच्छाओं की पूर्ति हेतु शक्तियां प्रदान की जाएंगी। किंतु अनेक असाध्य लक्ष्यों को निर्धारित कर अपनी ऊर्जा का अपव्यय करने से बचें – नियोजन में विवेक एवं यथार्थवादिता बनाए रखें।
मेष राशि में नवचंद्र की तिथि भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जब सूर्य एवं चंद्रमा नववर्ष में प्रथम बार ‘संयुक्त’ होते हैं। मेष राशि में नवचंद्र 24 मार्च को होगा तथा इसके विषय में एक पृथक लेख प्रकाशित किया जाएगा। किंतु 20 मार्च से लेकर मार्च के अंत तक के दिनों के महत्व पर ध्यान दें, क्योंकि इस कालखंड की ऊर्जा अत्यंत प्रबल होती है। अतः आपके भावनात्मक मनोभाव, विचारों की दिशा एवं कर्म आपके भावी बारह मासों के विकास हेतु शक्ति एवं दिशा निर्धारित करते हैं। सभी को अपने जीवन से प्रेम करने की शुभकामनाएं!



