उद्भव १ भाव का १० भाव में
ए. रिझोव. अल्मुतेन भावों के घरों में
करियर और पेशे के माध्यम से स्वयं को प्रकट करने का मार्ग। राजनीतिक करियर अथवा गतिविधि।
भाव के उद्भव का भावों में
नकारात्मक: दूसरों की उपेक्षा करने वाला एकाकी व्यक्ति, भीड़ से अलग दिखने की लालसा, दुर्लभ लक्ष्यों के प्रति चिंता।
सकारात्मक: करियर की उपलब्धियों के माध्यम से व्यक्तित्व का विकास, पूर्ण स्वतंत्रता की लालसा, ‘मूल से अलग होने’ तथा एकाकी मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति। ऐसे व्यक्ति के लक्ष्य सदैव व्यक्तिगत एवं अनूठे होते हैं। ऐसे लोग प्रायः अनदेखे नहीं रहते—या तो वे राजनीति में गंभीरता से संलग्न रहते हैं अथवा अभिनेता, उद्घोषक अथवा मनोरंजनकारी बन जाते हैं। व्यक्तित्व विकास की अनुभूति सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के माध्यम से होती है तथा उच्च नेतृत्वकारी पद तक पहुँचने पर इसे वास्तविक रूप में अनुभव किया जाता है। ऐसे लोग सार्वजनिक रूप से सामने रहना पसंद करते हैं; उन्हें मान्यता प्राप्त करने की जन्मजात आवश्यकता होती है। यह आवश्यकता अनिवार्य, आवेगी तथा सहज होती है, अतः यदि अवसरों का दुरुपयोग किया जाए तो यह विवादों का कारण बन सकती है। ऐसा व्यक्ति सदैव उत्तरदायित्व ग्रहण करने तथा नेता बनने के लिए तत्पर रहता है। यदि वह स्वयं पर नियंत्रण रखना सीख लेता है, तो अन्य लोग उसकी सलाह तथा व्यक्तिगत मामलों में सहायता हेतु सहज ही उसकी ओर आकर्षित होते हैं। इनमें से एक माता-पिता, प्रायः पिता, ने इस व्यक्ति के विकास को प्रभावित किया होता है। संभवतः वह जीवन भर उनके अनुकरण का प्रयास करेगा तथा उनके लक्ष्यों, रणनीतियों एवं उपलब्धि प्राप्ति के तरीकों की अनजाने में नकल करेगा।
इन्दुबाला. भाव के उद्भव का भावों में (भारतीय परंपरा)
कार्य में सफलता तथा ख्याति—ये कर्मयोगी होते हैं जो स्वयं तथा अपने कार्य के महत्व में विश्वास रखते हैं। वे बाह्य रूप से आकर्षक होते हैं, उत्तम वंश के होते हैं तथा उनका मन महत्वाकांक्षी विचारों से ग्रस्त रहता है।





