उद्धारक १० भाव का ५ भाव में
ए. रिझोव. मूल कुंडली में भावों के उद्धारकों
मनुष्य का लक्ष्य — संतुष्टि, मनोरंजन। यह निम्न स्तर है। थोड़ा ऊंचा स्तर — संतान, यह मूल वंश की कर्मभूमि है, और तीसरा स्तर — रचनात्मकता है।
भावों में भावों के उद्धारक
नकारात्मक: रचनात्मक शक्तियों का बिखराव, मनोरंजन और संतुष्टि पर समय तथा ऊर्जा का अपव्यय, अनेक निराशाएं, खोए हुए समय की भरपाई न कर पाना। प्रेमियों द्वारा रचनात्मक अभिव्यक्ति में बाधाएं, बिना सोचे-समझे प्रेम और निरर्थक खेलों की ओर झुकाव।
सकारात्मक: रचनात्मक, चमकदार तथा स्वतंत्र प्रकृति का संकेत, प्रतिभाओं के विकास तथा वृद्धि के अवसरों के रचनात्मक उपयोग को बढ़ावा। व्यक्ति की गतिविधियां मुक्त तथा स्वतंत्र होती हैं, वह अधिकारियों के अधीन रहना नहीं चाहता, कार्यालय के नियमों तथा सेवा संबंधी निर्देशों का पालन करने में जल्दबाजी नहीं करता। अपने बच्चों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनता है, जो उत्साहपूर्वक उसके कार्य को आगे बढ़ाते हैं। यह पहलू रंगमंच तथा फिल्म उद्योग में करियर के लिए अनुकूल है। करियर वृद्धि के दौरान रचनात्मक क्षमताओं का सफलतापूर्वक विकास होता है। स्वयं व्यक्ति प्रसिद्धि तक नहीं पहुंच सकता, किंतु उसके बच्चे उसके माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त कर सकते हैं, जिनकी करियर संबंधी उन्नति में वह सक्रिय रूप से सहायता करता है। यह पहलू अक्सर अभिनेताओं की माताओं में देखा जाता है।
इंदुबाला। भावों के उद्धारक (भारतीय परंपरा)
ये लोग धनवान तथा धर्मात्मा होंगे, अध्यापन तथा वित्तीय दलालगी (ब्रोकरेज) में संलग्न रहेंगे। उनके संतान में से कोई प्रसिद्धि प्राप्त कर सकता है; मनोरंजन जगत में सफलता तथा अनेक सुविधाओं का उपयोग करने का अवसर मिल सकता है।





