उद्गाता ११वें भाव का १०वें भाव में
ए. रिझोव. मूल कुंडली के भावों के उद्गाता
मनुष्य को हमेशा संरक्षक मिलते हैं। अकेले व्यक्ति के लिए कुछ हासिल करना कठिन होता है, किंतु समूह अथवा समुदाय के साथ वह सब कुछ प्राप्त कर सकता है। सामाजिक उन्नति, किंतु अकेले नहीं, अपितु समूह के साथ। एकाकी प्रयास से वह सब कुछ नहीं कर सकता।
भाव के उद्गाता भावों में
नकारात्मक: अचानक योजनाओं में विघ्न, मित्र एवं परिचितों द्वारा उठाए गए अवरोध, समूह द्वारा नेता को पद से हटाने की प्रवृत्ति, जीवन की पहल खोना एवं वास्तविक लक्ष्यों का बोध न होना—क्या प्राप्त करना है और किसके लिए संघर्ष करना है। संरक्षण या तो बिल्कुल नहीं होता अथवा कार्यप्रवाह में व्यवधान उत्पन्न होता है।
सकारात्मक: मित्र लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता करते हैं, जातीयता एवं कबीली संरक्षण का प्रयोग करने की प्रवृत्ति होती है। ऐसा व्यक्ति प्रायः उन व्यक्तियों के समूह का मुखिया होता है, जो परस्पर मिलकर कार्य करते हैं। संभावित अचानक करियर उन्नति, जो एक साधारण कर्मचारी को महान राजनीतिज्ञ अथवा सुधारक तक पहुंचा देती है। करियर सत्ता एवं राज्य से जुड़ा होता है। ऐसे लोग विशेष महत्वाकांक्षा रखते हैं, तथा उनके लक्ष्य उनके उत्तरदायी पद से जुड़े होते हैं। मित्रों का चुनाव करियर बनाने एवं उनकी सहायता प्राप्त करने की इच्छा से निर्धारित होता है। सही ऊर्जा के उपयोग से मित्र एवं परिचित सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में सहायता करते हैं। स्वयं व्यक्ति भी उनके आशाओं एवं इच्छाओं को पूरा करने में मदद करता है। अनेक मित्र उसके कार्य एवं करियर से जुड़े होंगे। ऊर्जाओं के गलत उपयोग से बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है, किंतु बाद में अजीब एवं अनपेक्षित घटनाओं के कारण सब कुछ खोना पड़ सकता है।
इंदुबाला. भाव के उद्गाता भाव में. (भारतीय परंपरा)
यह व्यक्ति दूसरों की सहायता करता है तथा उसका व्यवसाय अत्यंत समृद्ध होता है अथवा वह ऐसा कार्य करता है, जिससे जनता का ध्यान आकर्षित होता है। उसका कार्य लोकहित के लिए सम्मानित होता है। वह उन लोगों से मित्रता करता है, जो समाज में उच्च पद पर आसीन होते हैं।





