उद्धारक ३ भाव का ३ भाव में
ए. रिझोव. मूल कुंडली के भावों के उद्धारक
सबसे सामान्य, सबसे उपयुक्त स्थिति। अर्थात् लेखक, पत्रकार, व्यक्ति जो जनता अथवा बड़ी संख्या में लोगों के साथ कार्य करता है। प्रत्यक्ष अथवा मुद्रित माध्यमों द्वारा, अथवा भाई-बहनों की सहायता से।
भाव के उद्धारक का भाव में
नकारात्मक: निरंतर अनावश्यक संपर्कों की चिंता में व्यस्त रहता है, हलचल, बकवास तथा पड़ोसियों से झगड़ों की प्रवृत्ति रखता है। वार्तालाप निरर्थक तथा फालतू जानकारी एकत्रित करने तथा साधारण गपशप में डूबने की प्रवृत्ति। फोन पर लंबे समय तक बातें करना पसंद करता है। रिश्तेदार अक्सर प्रतिभाओं को उजागर करने में बाधा बनते हैं।
सकारात्मक: जीवन के हर क्षण में निरंतर सीखता रहता है, संचार, संबंध तथा नए जीवन क्षेत्रों की समस्याओं पर बढ़ी हुई ध्यान देने की प्रवृत्ति। जीवन सरलता से बदलती हुई स्थितियाँ लाता है। संबंध तथा संपर्क निरंतर नवीनीकृत होते रहते हैं। नए संपर्क सदैव नए अनुभव उत्पन्न करते हैं। प्रायः ऐसी स्थिति प्रमुख साहित्यिक प्रतिभाओं से जुड़ी होती है। ऐसा व्यक्ति शब्दों के साथ, लिखित अथवा मौखिक, सहजता से व्यवहार करता है। उसे अपने विचारों तथा मान्यताओं को शब्दों में व्यक्त करने की आवश्यकता महसूस होती है तथा वह सदैव अपने विचारों की अंतिम सत्यता में गहन विश्वास रखता है। उसकी अत्यधिक स्पष्टवादिता कष्टप्रद बन सकती है। अपरिचित स्थिति में भी अच्छी तरह से मार्गदर्शन कर सकता है तथा उस दिशा तथा मार्ग को भली-भाँति समझता है जिस ओर बढ़ना चाहिए। वर्तमान स्थिति को तीव्रता से ग्रहण करता है तथा ‘यहाँ और अभी’ में स्थिर रहने में सक्षम होता है।
इंदुबाला। भाव के उद्धारक का भाव में। (भारतीय परंपरा)
संतुष्ट व्यक्ति; अपने उपलब्धियों से संतुष्ट, अपने परिवार के मध्य आनंदित रहता है। साहसपूर्वक बोल तथा कार्य कर सकता है। प्रकाशन व्यवसाय द्वारा धन कमा सकता है।




