उद्गाता ९ भाव का १० भाव में
ए. रिझोव. मूल कुंडली में भावों के उद्गाता
सामाजिक उत्थान विचारधारा के सामाजिक जीवन में प्रवेश के माध्यम से होता है। अर्थात्, विचारकों का। राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन के साथ ही प्राप्त शिखर से पतन भी होता है।
भावों के उद्गाता
नकारात्मक: यात्राओं में लक्ष्य प्राप्त नहीं होते, यात्राएं मुख्य कार्यों से ध्यान भटकाती हैं, दूर देश में प्रतिष्ठा को क्षति पहुंच सकती है, आकांक्षाएं अवास्तविक एवं विचित्र हो सकती हैं, संभवतः विचारधारात्मक पतन एवं जनसमूह के सामने नैतिक पतन। सकारात्मक: धर्माध्यक्ष एवं नैतिक अधिकार में उन्नति के लिए उत्तम योग। प्रतिष्ठा यात्राओं से सुदृढ़ होती है। सफलता घर से दूर संभव है, संभवतः दूसरे प्रदेश में बड़ी ख्याति। ऐसे व्यक्ति का करियर सामान्यतः दूरस्थ यात्राओं एवं पर्यटन से जुड़ा होता है। परिवार में से कोई दूसरे प्रदेश में कार्यरत हो सकता है। राजदूत, राजनयिक अथवा विदेश व्यापार मिशन का कर्मचारी बन सकता है। दूसरों को सफलतापूर्वक शिक्षित करने की क्षमता रखता है। खेल जगत का नायक अथवा मनोरंजन उद्योग में सफलता प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति का व्यक्तिगत दर्शन उसके सत्ता संबंधी अधिकार के उपयोग पर गंभीर प्रभाव डालता है तथा राष्ट्रीय नीति के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है।
इन्दुबाला. भावों के उद्गाता. (भारतीय परंपरा)
व्यावसायिक क्षेत्र में सफलता एवं व्यापक ख्याति की अपेक्षा। प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ मित्रता, मानवतावादी गतिविधियों में भागीदारी, पर्याप्त धन एवं साहस की भी संभावना।





