🔶 3रा स्तर नियति — मध्यम (द्राध-अद्राध)
यह कठोर नियमों वाली जेल नहीं, परंतु पूर्ण स्वतंत्रता भी नहीं है। यहाँ आपको 50% स्वतंत्रता प्राप्त होती है, शेष भाग कर्म का है। जन्म कुंडली में यह नियति तब प्रकट होती है जब उत्तर या दक्षिण नोड किसी ग्रह (सूर्य और चंद्रमा को छोड़कर) से युक्त हो अथवा नोड भावों के कस्प पर स्थित हों, किंतु कोणीय अक्षों (लग्न-युग्म, चतुर्थ- दशम) पर नहीं।
यह कर्म संतुलन है: जीवन का आधा भाग ब्रह्मांड के नियंत्रण में, शेष भाग आपके हाथ में।
🔷 4था स्तर नियति — निम्न (अद्राध)
ये वे साधक हैं जिन्हें ब्रह्मांड ने न तो कारागार में भेजा है और न ही कर्म कॉलोनी में। यहाँ स्वतंत्रता से सांस ले सकते हैं: कर्म प्रणाली ने पूर्व जन्मों की आज्ञाकारिता को मान्यता दी है, अतः अधिक स्वतंत्रता प्रदान की है।
केवल 30% घटनाएँ पूर्वनिर्धारित होती हैं, शेष भाग आपके चुनाव, कर्म और स्वतंत्र इच्छा का क्षेत्र है।
जन्म कुंडली में इसे सरलता से पहचाना जा सकता है: नोड न तो किसी ग्रह से युक्त हों और न ही किसी भाव के कस्प पर स्थित हों। यही अद्राध की स्थिति है, जिसका अर्थ है ‘स्वतंत्रता’।




