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मुख्य जीवन घटनाएँ व्यक्ति के परिवेश के इर्द-गिर्द घटित होती हैं। इसमें वह स्वयं को एक प्रवाह में बहती हुई तिनके की तरह शामिल पाता है। व्यक्ति के जीवन के पाठों में मुख्य बात एक साझा कार्य होता है, जिसमें वह स्वयं केवल एक छोटा-सा हिस्सा होता है, और उसका मुख्य जीवन लक्ष्य उस साझा कार्य के प्रति उत्तरदायी होना होता है, न कि अपने व्यक्तिगत अस्तित्व के प्रति। उसे स्वयं को समूह से अलग नहीं दिखाना चाहिए, बल्कि सामूहिक चक्रों के साथ विलय की आकांक्षा करनी चाहिए।
जीवन में बहुत कुछ समाज, परिस्थितियाँ और परिवेश ही तय करते हैं। व्यक्ति किसी न किसी साझा समस्या के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है। जीवन के अनेक निर्णय साझा कार्य की दृष्टि से लिए जाते हैं। जिन व्यक्तियों की पश्चिमी गोलार्ध (भाव 4-9) प्रबल होती है, वे अक्सर ऐसे साथियों की तलाश करते हैं जो उनके अभाव की पूर्ति कर सकें। ऐसे लोग अक्सर राजनीति में “लकड़ी फाड़ने” का काम करते हैं, क्योंकि वे हर जगह शत्रुओं की तलाश करते हैं, स्वयं को समाज के विरुद्ध खड़ा करते हैं, और अपना जीवन पूरे समाज अथवा समूह के विरुद्ध संघर्ष में व्यतीत करते हैं अथवा चाहते हैं कि पूरा समाज अथवा समूह उन्हें व्यक्तिगत रूप से समर्थन दे।





