
हम राशि चक्र के चिह्नों के बारे में मिथकों के माध्यम से लेखों की श्रृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं। आज हमारे पास है मकर राशि।
आकाश से निर्मित निर्बाध स्थान में, आदिम जलों के मध्य पृथ्वी का निर्माण होता है। तत्वों की असीम गति का कोई लक्ष्य नहीं होता और वह परिणाम की ओर प्रवृत्त होती है। किंतु तत्वों के मध्य ठोस पदार्थ का एक जगमगाता संसार प्रकट होता है, जिसकी एक निश्चित शुरुआत और अंत होता है। सीमित यह जगत स्थिर है: इसकी रक्षा कठोर नियमों द्वारा होती है, जिन्हें समय और नियति के नियम कहा जाता है। ज्योतिष में इनका प्रतीक ग्रह शनि है।
वह भूमि जहाँ पूर्वजों को दफनाया जाता है, मनुष्य के लिए अपनी हो जाती है। प्रवास समाप्त हो जाता है और मनुष्य को अपनी जन्मभूमि मिल जाती है, जिस अवधारणा का हस्तांतरण पीढ़ी-दर-पीढ़ी होता रहता है। जनजाति अपने लिए एक निश्चित भू-भाग निर्धारित कर लेती है और देवताओं के भी जनजातीय स्वरूप हो जाते हैं, जो अपने वंश की रक्षा करते हैं। ऐसे ही हैं रोमन देवी वेस्ता, शनि की ज्येष्ठ पुत्री, अथवा रिड, जो स्लाव पौराणिक कथाओं के सर्वोच्च देवता हैं।
शनि द्वारा संरक्षित व्यक्तियों का कार्य है प्रत्येक वस्तु को उसके पूर्ण परिणाम तक पहुँचाना—उसकी पूर्णता तक। वे जो भी हाथ में लेते हैं, उसे सिद्ध करते हैं, यहाँ तक कि अपनी नियति को भी। वे अपने स्वरूप और शैली को क्रिस्टलीकृत करते हुए अपने जीवन को एकमात्र लक्ष्य तक सीमित कर देते हैं। मकर राशि वाले लोग अपने जीवन को एक ऐसे लक्ष्य तक सीमित कर देते हैं, जो वेस्ता की अदृश्य लौ के समान उनकी आत्मा को गर्माहट प्रदान करता है। लक्ष्य ही उनका आंतरिक स्तंभ है, जो पदार्थ को आत्मा में रूपांतरित करने की क्षमता प्रदान करता है।
मकर राशि वाले सबसे अंधकारमय और कठिन काल में जन्म लेते हैं, और यह राशि चक्र का सबसे कठोर एवं गंभीर चिह्न है। मकर राशि की उपलब्धियाँ जीवन के अर्थपूर्ण पड़ाव बन जाती हैं। बाहरी परिस्थितियों का उपयोग अपने कार्य के पक्ष में करते हुए, वे नियोजित कार्य को समय पर पूर्ण कर लेते हैं, ताकि उनकी यात्रा के सुनिश्चित मार्ग पर अगला सोपान बन सके। सर्वश्रेष्ठ स्मृति और व्यक्तित्व के स्तंभ का सहारा लेते हुए, यह चिह्न अपने अस्तित्व और अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वयं लेता है। ऐसा लगता है मानो एक रचनाकार मिट्टी से संसार गढ़ रहा हो। इससे मनुष्य को उन वृद्धों का जीवन-ज्ञान प्राप्त होता है, जिन्होंने कभी उसकी जाति की स्थापना की थी और पृथ्वी-गाया को बचाए रखा था।
मकर राशि के तारामंडल का प्राचीन स्वरूप एक सरीसृप है—आधा पशु, आधा मछली, जो अभी मनुष्य नहीं बना है। मानव जाति के अतीत को अपने तक ले आने वाले इस चिह्न को वर्तमान में जीने में कठिनाई होती है। कभी-कभी यह यांत्रिक दृष्टिकोण अपनाने लगता है, अपने चारों ओर के जगत को सीमित और निष्प्राण कर देता है, ताकि वह अपने लक्ष्य की प्राप्ति में बाधा न बने। शनि के जगत में कठोर सिद्धांत ‘जैसा तुम देते हो, वैसा ही पाओगे’ का शासन है, जो मनुष्य को अपने निकटतम और प्रिय वस्तुओं का बलिदान करने को विवश करता है, ताकि बाद में आत्मा की पुकार सुन सके। मकर राशि वाले स्वयं को अटलास के समान समझते हैं, जो आकाश को अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। इस उत्तरदायित्व के बोझ को उनके दृष्टिकोण की सीमाओं को संकुचित नहीं करना चाहिए।
(लेखिका ए. ग्रोमोवा, सामग्री स्रोत: सेमीरा एवं वी. वेताश द्वारा “ज्योतिष एवं मिथक”)





