प्रोज़र्पिना कु मीन राशि में
पावलो ग्लोबा. ग्रह राशिचक्र में
1918 – 1989 ई., 65 वर्ष। यहाँ प्रोज़र्पिना शुक्र तथा कीरोन की स्थिति में, शनि की उच्च राशि तथा वायु तत्त्व के चिह्न में स्थित है। यह स्थिति मानवीय सम्बन्धों के रूपान्तरण का प्रतीक है। जो कुछ अटल एवं स्थिर प्रतीत होता था—विवाह, माता-पिता, परिवार, परम्परागत सामाजिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध—सब कुछ विस्फोटित हो उठता है। इस काल में नये कानून एवं अन्तर्राष्ट्रीय विधि (तुलाराशि विधि का प्रतीक है) तथा उनके प्रति नया दृष्टिकोण उत्पन्न होता है। सन् 1917 तक संसार एकरूप था। सन् 1918 के पश्चात् वह अस्थिर तराजुओं के समान हो गया, जहाँ किसी भी पल में कोई भी तराजू भारी नहीं पड़ सकता। विश्व युद्ध, निरन्तर शान्ति एवं न्याय की माँग तथा असन्तुलन के निरन्तर उल्लंघन उत्पन्न होते हैं। नेताओं के वास्तविक कार्य उनके कथनों के विपरीत होते हैं। किन्तु जब तक प्रोज़र्पिना प्लूटो के साथ संघर्ष में नहीं आई, संसार डोलता रहा, किन्तु सापेक्षिक सन्तुलन में था। जब सन् 1933-34 में प्रोज़र्पिना प्लूटो के साथ वर्ग दृष्टि में आई, संसार विनाश के कगार पर आ गया। सन् 1945 तक तराजुओं के पलड़े बराबर हो गये। सन् 1984 में प्रोज़र्पिना एवं प्लूटो का युति हुआ—मानव जाति वैश्विक पुनर्निर्माण के मार्ग पर अग्रसर हुई। इसके अतिरिक्त, वृश्चिक तथा धनु में ग्रहों के विशाल संग्रह ने वैचारिक एवं धार्मिक क्रान्ति को चिह्नित किया। व्यक्तित्व पर प्रोज़र्पिना का प्रभाव यह है कि आप व्यक्तिगत सामंजस्य का माप ढूँढ़ सकते हैं, पूर्णतः वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण रखते हैं, किसी भी व्यक्ति के विचार को समझने तथा उसके जीवन को उसकी दृष्टि से देखने की क्षमता रखते हैं। आपमें उत्तरदायित्व एवं कर्तव्य की उच्च चेतना होती है। दूसरों के साथ सम्बन्ध—विवाह, मित्रता—आपके लिए पवित्र अवधारणाएँ हैं। उच्च आध्यात्मिक संगठन आपको सम्पूर्ण मानव जाति के जीवन में जीने तथा अपने पुनर्निर्माण के लिए सामग्री प्राप्त करने, कला के पुनर्मूल्यांकन हेतु निजी मानदण्ड स्थापित करने तथा अधिक न्यायपूर्ण, व्यक्तिवादी एवं मानवीय विधियों एवं साधनों का सृजन करने में समर्थ बनाता है। निम्न स्तर पर प्रोज़र्पिना व्यक्ति को शुभ एवं अशुभ का मिश्रण कर, एक को दूसरे के स्थान पर प्रस्तुत करने—अर्थात् भेड़िये को भेड़ के वेश में—की प्रवृत्ति प्रदान करती है। आप निर्लज्जतापूर्वक दूसरों पर अपना दृष्टिकोण थोपते हैं, सिद्धान्तहीनता आपमें उच्च सिद्धान्तवाद के मुखौटे में छिपी होती है। आप स्वयं को न्यायसंगत ठहराने में किसी सीमा को नहीं जानते, अपने दोषों को दूसरों पर आरोपित करने में सक्षम होते हैं तथा सदैव तराजुओं को अपने पक्ष में झुकाने का प्रयास करते हैं।
लारिसा नाज़ारोवा. कर्म ज्योतिष
वर्ष 1918-1984 (67 वर्ष) तक शुक्र तथा कीरोन की स्थिति में रही। इस स्थिति ने मानवीय सम्बन्धों के रूपान्तरण को जन्म दिया। जो कुछ अपरिवर्तनीय एवं दृढ़ प्रतीत होता था—विवाह, पारिवारिक सम्बन्ध, सामाजिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध—सब कुछ ध्वस्त हो गया। सन् 1918 के पश्चात् संसार अस्थिर तराजुओं के समान हो गया, जहाँ निरन्तर पलड़ों का झूलना चलता रहा। विश्व युद्ध, निरन्तर शान्ति एवं न्याय की माँग तथा असन्तुलन के निरन्तर उल्लंघन उत्पन्न होते रहे। नये कानून एवं अन्तर्राष्ट्रीय विधि तथा उनके प्रति नवीन दृष्टिकोण का उदय हुआ। सन् 1933-34 में प्रोज़र्पिना एवं प्लूटो के मध्य वर्ग दृष्टि स्थापित हुई तथा जो संसार सापेक्षिक सन्तुलन में था, वह विनाश के कगार पर आ गया। सन् 1945 में तराजुओं के पलड़े बराबर हो गये। सन् 1984 में प्रोज़र्पिना एवं प्लूटो का युति हुआ—मानव जाति वैश्विक पुनर्निर्माण के मार्ग पर अग्रसर हुई। व्यक्तित्व पर प्रोज़र्पिना का प्रभाव यह हुआ कि व्यक्ति में वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण उत्पन्न हुआ, दूसरों के विचारों को समझने की क्षमता विकसित हुई। ऐसे व्यक्ति में उत्तरदायित्व एवं कर्तव्य की उच्च भावना होती है तथा वह सम्पूर्ण मानव जाति के जीवन में जीने तथा अपने पुनर्निर्माण हेतु सामग्री प्राप्त करने में समर्थ होता है। निम्न स्तर पर प्रोज़र्पिना व्यक्ति को शुभ एवं अशुभ का मिश्रण कर, दूसरों पर अपना दृष्टिकोण थोपने तथा उच्च सिद्धान्तवाद के मुखौटे में छिपी सिद्धान्तहीनता प्रदान करती है।




