चंद्रमा – मंगल की युति: प्रबल भावनाएं, क्रोध के आवेग। शुभ दृष्टियों के साथ – अत्यंत ऊर्जावान, दृढ़निश्चयी व्यक्ति, जबकि अशुभ दृष्टियों के साथ – क्रोधी, ईर्ष्यालु स्वभाव वाले लोग। यदि मंगल बलवान नहीं है और शनि का अनुशासनात्मक प्रभाव नहीं है, तो व्यक्ति आवेगों के वशीभूत होकर, बुद्धि के बजाय भावनाओं के आधार पर कार्य करता है।
कैथरीन ओबे: चंद्रमा – मंगल की युति
युति: संवेदनशीलता से जुड़ी ऊर्जा को दर्शाती है। व्यक्ति आंतरिक संतुलन तथा प्रायः परिवारिक संतुलन के लिए संघर्षरत रहता है, और इस दृष्टि से उसकी साहसिकता की सराहना करनी चाहिए। जो विवाद दूसरों से संबंधित हो और स्वयं को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न करता हो, उसमें व्यक्ति उदासीन रहता है।
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ए. पोडवोडनी: चंद्रमा – मंगल की युति
चंद्रमा की युति: संकीर्ण व्यक्तिगत स्वार्थ व्यक्ति को संपूर्ण जगत को आत्मसात करने से रोकते हैं। चंद्रमा के साथ युति किसी ग्रह को मानव के अवचेतन जीवन में सक्रिय भागीदारी प्रदान करती है। व्यक्ति स्वयं को ग्रह के सिद्धांत से गहराई से जोड़ा हुआ अनुभव करता है, जो उसकी आवश्यकताओं, विशेषतः जीवन संबंधी तथा सामाजिक आवश्यकताओं को प्रभावित करता है।
अल्प विकसित युति तथा सामान्यतः अपरिपक्व चंद्रमा वाले व्यक्तियों में चंद्रमा प्रायः अन्य किसी भी ग्रह से अधिक प्रभावी होता है (जीवन में स्वार्थ का सिद्धांत हावी रहता है)। युति में सम्मिलित ग्रह चंद्रमा के सिद्धांत को अपनी कार्यक्रम में परिवर्तित कर देते हैं, जिससे वह परजीवी उपभोग का एक माध्यम बन जाता है। उदाहरणार्थ, चंद्रमा – शुक्र की युति वाले व्यक्ति सौंदर्य, सामाजिक संपर्क तथा प्रेम का आनंद लेते हैं, किंतु उनके संपर्क के पश्चात लोगों को, विशेषतः प्रेमियों को स्वयं को संभालने तथा मानवता में विश्वास पुनः स्थापित करने में लंबा समय लगता है। इसी प्रकार, कला के कार्यों से भी ऐसे व्यक्ति केवल बाहरी धूसरता को ही हटा पाते हैं, जो आसानी से पुनः आ जाती है अथवा कभी-कभी पूर्णतः नष्ट हो जाती है। यहां परम सृजनात्मकता का सिद्धांत व्यक्ति की रुचि अथवा परिस्थितियों की विलक्षणता में प्रकट होता है, जो स्वयं को ही आत्मसात कर लेता है।
युति के परिष्करण से ग्रह के सिद्धांत से संबंधित विषयों में अत्यंत सूक्ष्म तथा प्रायः अप्रत्याशित ग्रहणशक्ति उत्पन्न होती है, जो बाद में (और चंद्रमा के परिष्करण के साथ) मानवता तक उच्च सिद्धांतों के प्रसारण की जीवन आवश्यकता में परिवर्तित हो जाती है। उच्च स्तर पर यह किसी सार्वजनिक कार्यकर्ता अथवा भविष्यवक्ता के रूप में प्रकट हो सकता है, जो राष्ट्रीय कर्म से गहराई से जुड़ा होता है।
मंगल की युति: अदृश्य भार। वास्तविक शक्ति अग्राह्य।
मंगल के साथ युति किसी ग्रह को शक्ति प्रदान करती है, जो निम्न स्तर पर विध्वंसकारी होती है। ग्रह का सिद्धांत ऊर्जा से फैलता प्रतीत होता है, किंतु उसे रचनात्मक रूप से निर्देशित न कर पाने के कारण प्रायः आक्रमण तथा विध्वंस में परिणत हो जाता है। उदाहरणार्थ, अपरिपक्व चंद्रमा – मंगल की युति वाले व्यक्ति स्वयं के शरीर के प्रति आक्रमण प्रदर्शित करते हैं, जबकि शनि के साथ युति आत्म-गहराई तथा एकाग्रता के प्रयासों में असाधारण बाधाएं उत्पन्न करती है, जैसे अचानक खिड़की का टूटना अथवा फुटबॉल के गेंद का कमरे में प्रवेश करना।
परिष्करण का मार्ग प्रारंभ में ग्रह द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में अतिरिक्त ऊर्जा पर नियंत्रण प्राप्त करने की ओर होता है, किंतु वास्तविक परिष्करण ऊर्जा के परिष्कार तथा कंपन के उन्नयन की ओर होता है। उदाहरणार्थ, चंद्रमा – मंगल की युति में मांसपेशियों का विकास करने के बजाय मानसिक ऊर्जा के नियंत्रण का अभ्यास करना श्रेयस्कर होता है। इसी प्रकार, शनि के साथ मंगल की युति में विकर्षणों अथवा प्रलोभनों से संघर्ष करने के बजाय एकाग्रता तथा ध्यान की गहराई बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उच्च स्तर पर मंगल ग्रह को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है तथा उसकी सृजनात्मक क्षमताओं को गुणात्मक रूप से उन्नत करता है, किंतु इसके लिए इस भ्रामक सिद्धांत को त्यागना आवश्यक है कि ‘बलवान होना ही अच्छा है’ तथा ग्रह के बलात अधीनता को समाप्त करना होगा, जो निम्न तथा मध्यम स्तरों पर विशेष रूप से देखा जाता है।





