उद्गाता नवम भाव का नवम भाव में
ए. रिझोव. मूलाधिपति भावों के भावों में
स्वयं स्थित होना। यह व्यक्ति एक विचार का होता है – जीवन में एक ही विचार, अर्थात्, कट्टरपंथी। किंतु चूँकि विचार एक ही होता है – मृत्युपर्यंत कीर्ति, सम्मान, लोकप्रियता और सामाजिक उन्नति। किंतु स्वदेश में नहीं।
भाव के उद्गाता का भावों में
नकारात्मक: संरक्षणवादियों के साथ अथक वैचारिक संघर्ष, प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाने का खतरा, अनेक दृढ़ प्रतिद्वंद्वी, निरर्थक यात्राएँ और उनमें असफलताएँ। सकारात्मक: जीवन स्थितियों का सक्रिय विस्तार, सर्वांगीण रुचियाँ, अनेक यात्राएँ, दूसरों को ऊर्जा प्रदान करने की उत्कृष्ट क्षमता। यह प्रतिष्ठित व्यक्ति एक उत्तम शिक्षक एवं उपदेशक होता है। यह व्यक्ति प्राप्त उपलब्धियों पर संतुष्ट नहीं होता और अनेक लोगों को अपने कार्य में सम्मिलित करता है। संभवतः अनेक चमकीली यात्राएँ अन्य प्रदेशों में हों। यह योग एक शिक्षण के प्रति असाधारण क्षमताओं, अपने शिष्यों की मनोवृत्ति के अनुरूप स्वयं को ढालने और उनके मन एवं हृदय के साथ तादात्म्य स्थापित करने की क्षमता को सूचित करता है। यह अनुसंधानकर्ता नए संसारों की खोज में निरंतर यात्रारत रहता है।
इन्दुबाला। भाव के निर्देशक का भावों में। (भारतीय परंपरा)
ऐसे संयोजन के लिए बड़ी धार्मिक प्रवृत्ति, दूसरों का मार्गदर्शन करने एवं उन्हें कार्य करने के लिए प्रेरित करने की क्षमता विशेष होती है। ऐसे लोग राजनीतिक लक्ष्यों को निर्धारित कर सकते हैं, बारंबार यात्राओं का आनंद उठाते हैं, धनवान होते हैं तथा पिता के साथ अच्छे संबंध रखते हैं।





