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दृष्टि और रेट्रोग्रेड: आकाशीय गतियाँ हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं दृष्टि और रेट्रोग्रेड: आकाशीय गतियाँ हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं

दृष्टि और रेट्रोग्रेड: आकाशीय गतियाँ हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं

ग्रहीय स्थितियाँ तथा उनका प्रभाव

जुलाई 2026 के आरंभ में आकाशीय चित्र काफी रोचक दिखाई देता है। सूर्य 17.3° कर्क में स्थित है, चंद्रमा 9.1° वृष में है, जबकि बुध, जो वर्तमान में प्रतिगामी अवस्था में है, 23° कर्क में स्थित है। इन ग्रहीय स्थितियों का हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है, खासकर जब हम उनके मध्य निर्मित होने वाले आस्पेक्ट्स पर विचार करते हैं।

उदाहरण के लिए, चंद्रमा तथा वृष राशि में स्थित चिरोन के मध्य आस्पेक्ट्स से भावनात्मक संवेदनशीलता में वृद्धि तथा स्थिरता एवं सुरक्षा की आवश्यकता उत्पन्न हो सकती है। लोग स्वयं के चारों ओर एक आरामदायक तथा सुरक्षित वातावरण निर्मित करने की तीव्र इच्छा अनुभव कर सकते हैं, जो उनके घर अथवा परिवेश को व्यवस्थित करने की इच्छा के रूप में प्रकट हो सकता है।

बुध की प्रतिगामी अवस्था तथा उसके परिणाम

बुध की प्रतिगामी अवस्था वह काल होता है, जब ग्रह विपरीत दिशा में गति करता प्रतीत होता है। यह अवधि कई सप्ताह तक रह सकती है तथा हमारे संचार, परिवहन तथा तकनीकों पर विशेष प्रभाव डाल सकती है। बुध की प्रतिगामी अवस्था के दौरान लोग संवाद में कठिनाइयों का अनुभव कर सकते हैं, उपकरणों में तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं तथा यात्रा में भी कठिनाइयां आ सकती हैं।

व्यावहारिक रूप से अक्सर देखा जाता है कि बुध की प्रतिगामी अवस्था के दौरान लोग अपने विचारों तथा भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाइयों का अनुभव करते हैं। उन्हें ऐसा लग सकता है कि उन्हें समझा नहीं जा रहा अथवा उनके शब्दों की गलत व्याख्या हो रही है। इसलिए इस अवधि में अपनी भाषा तथा संवाद पर विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक होता है।

आस्पेक्ट्स तथा प्रतिगामी अवस्था के साथ कार्य करने हेतु व्यावहारिक सुझाव

ग्रहों के आस्पेक्ट्स तथा प्रतिगामी अवस्था के साथ कार्य करने हेतु सर्वप्रथम उनके प्रभाव को अपने व्यक्तिगत कुंडली में समझना आवश्यक है। यदि आपके व्यक्तिगत कुंडली में स्थित ग्रह वर्तमान में पारगामी ग्रहों के साथ आस्पेक्ट्स में हैं, तो इसका आपके जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है।

बुध की प्रतिगामी अवस्था के दौरान विशेष रूप से अपने संवाद तथा तकनीकों पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक होता है। अपने संदेश भेजने से पूर्व उनकी जांच करें, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने से पूर्व उन्हें दोबारा देख लें तथा तकनीकी समस्याओं के लिए तैयार रहें। इस अवधि में आप नए कार्यों को आरंभ करने के बजाय अपने परियोजनाओं तथा विचारों की समीक्षा तथा पुनर्मूल्यांकन में समय व्यतीत कर सकते हैं।

यदि आप इस अवधि में कठिनाइयों का अनुभव कर रहे हैं, तो ऐसे कार्यों में समय व्यतीत करें जो आपको शांति तथा आराम प्रदान करें। यह ध्यान अथवा योग अथवा प्रकृति में टहलना हो सकता है। आप अपने व्यक्तिगत कुंडली पर आस्पेक्ट्स तथा प्रतिगामी अवस्था के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने हेतु ज्योतिषीय परामर्श भी ले सकते हैं।

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