मंगल-वृश्चिक वर्ग
(गमन मंगल → जन्म कुंडली वृश्चिक)
बालक कुंडली के लिए विभिन्न स्रोत
आपका बच्चा भावुक, कल्पनाशील और रचनात्मक प्रतिभा से संपन्न है। उसकी प्रकृति को समझना कठिन है। कभी-कभी वह असमंजस या भ्रम की स्थिति में रहता है अथवा मूर्खतापूर्ण कार्य कर बैठता है। वह स्वयं को पीड़ित व्यक्तियों से जोड़ सकता है। किंतु दूसरों का यथार्थ मूल्यांकन करने की क्षमता उसमें दुर्बल होती है और वह धोखा खा सकता है अथवा अपने आदर्शों के प्रति निराश हो सकता है। माता-पिता को बच्चे को स्वयं की मदद करना तथा निराशा जैसे भावों पर नियंत्रण रखना सिखाना चाहिए। भावनाओं पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। बच्चा औषधियों (विशेषतः नशीले पदार्थों) के प्रति खराब प्रतिक्रिया दे सकता है तथा विषाक्तता और संक्रामक रोगों के प्रति संवेदनशील होता है।
हे मनो
अंतर्मन की गहराइयों से उठने वाली विचित्र भावनात्मक इच्छाएं जो विद्यमान व्यवस्था की सीमाओं में नहीं आतीं। यदि इन इच्छाओं को दबाया जाता है, तो संभव है मनोविकृति अथवा मतिभ्रम। यदि नहीं दबाया जाता, तो मदिरापान, नशीली वस्तुओं का सेवन। अत्यंत अशुभ पहलुओं में विश्वासघात, कपट अथवा अपयश। यौन विकृतियां जो कभी-कभी चित्रकला जैसे कलात्मक माध्यमों में अभिव्यक्ति पाती हैं। आत्म-प्रवंचना की प्रवृत्ति, क्योंकि अपने कार्यों के वास्तविक कारणों से अनभिज्ञ रहता है। लोगों के साथ संबंधों में भ्रम एवं संकोच।
कैथरीन ग्लोबा
विपक्ष, वर्ग: जैसे संयोग में होता है, व्यक्ति किसी आदर्श का प्रतिपादन करना चाहता है किंतु उसके अर्थ को गलत समझता है और असंगत व्यवहार करता है। चूंकि उसमें यथार्थवाद एवं विवेक की कमी होती है, वह भ्रमित हो जाता है तथा मार्गदर्शन खो देता है। अक्सर वह असाध्य लक्ष्यों को निर्धारित करता है अथवा हवा में किले बनाता है।
कोण का नाम नहीं, बल्कि विशिष्ट चार्ट में डिग्री और ऑर्ब के अनुसार पढ़ा जाता है: अपनी जन्म कुंडली की गणना करें और अपने वर्ग (स्क्वायर) देखें सटीक ऑर्ब्स और सभी पहलुओं की पूरी सूची के साथ।
अवेसेलोम पोडवोड्नी
मंगल वर्ग: लेखन कौशल रूपी उस तलवार से गोभी काटने का प्रयास नहीं करना चाहिए। मंगल वर्ग ग्रह सिद्धांतों को कठोर, असंगत शक्ति प्रदान करता है जो उसके सूक्ष्म अभिव्यक्तियों को नष्ट कर देती है। यह विनाश आंतरिक एवं बाह्य जगत दोनों में घटित होता है। यदि व्यक्ति इसका प्रतिकार नहीं करता, तो इसका प्रभाव अत्यंत प्रबल होता है। कर्मानुसार मंगल वर्ग का अर्थ है ग्रह सिद्धांत के प्रत्यक्ष, ऊर्जावान अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध (जो कभी भी सामंजस्यपूर्ण अथवा रचनात्मक नहीं होता) तथा इसके उच्चतर स्वरूप के साधन की आवश्यकता। व्यक्ति इन क्षेत्रों में अत्यंत अभिरुचि रखता है जिनका संबंध ग्रह से है तथा एक बल उसे वहां खींचता है। उसकी अपनी क्षमताओं (अक्सर उपलब्धियों) के प्रति धारणा अत्यंत उच्च हो सकती है किंतु असफलताएं एवं निराशाएं शीघ्र ही प्रकट हो जाती हैं। निम्न स्तर पर यह व्यक्ति अपने आस-पास के लोगों के लिए कभी-कभी खतरनाक हो सकता है किंतु स्वयं सर्वाधिक जोखिम उठाता है। मंगल वर्ग के मामले में कर्म का नियम जो असंगति जगत में प्रविष्ट कराने के लिए दंडित करता है, तीव्र गति से कार्य करता है (कभी-कभी प्रतिकारात्मक प्रभाव आंतरिक जगत तक सीमित रहता है तथा बाह्य जगत से अदृश्य रहता है, किंतु व्यक्ति का सामान्य स्तर तीव्रता से गिर जाता है)। आंतरिक जीवन में यह पहलू व्यक्ति को अपने अवचेतन के कठोर कार्यक्रमों, यहां तक कि पशुवत् प्रवृत्तियों (जो इस मामले में अत्यंत स्पष्ट एवं प्रमुख होती हैं, विशेषतः जब ग्रह शामिल होता है) को समझने तथा उन्हें अधिक सुसंस्कृत एवं स्वीकार्य स्वरूप में रूपांतरित करने का अवसर प्रदान करता है अर्थात उच्चतर कंपन ऊर्जाओं में परिवर्तन। साधना से व्यक्ति ग्रह के सूक्ष्म ऊर्जाओं पर कार्य कर सकता है किंतु इसकी सूक्ष्मताओं को अन्यथा कभी नहीं समझ सकता। व्यक्ति ग्रह की निम्नतर स्वरूप की विनाशकारी शक्ति को जान जाएगा जिससे उसे दूसरों के ग्रह सिद्धांतों के साधन में सहायता मिलेगी तथा अपने संबंधित क्षेत्रों में अपनी निम्नतर प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखने में सक्षम होगा। किंतु निम्नतर कंपन ऊर्जाओं के मुक्त प्रवाह पर वह कभी अधिकार नहीं पा सकेगा। उदाहरणार्थ, मंगल-वृश्चिक वर्ग से व्यक्ति विलासी अथवा उत्कृष्ट कामुकता विशेषज्ञ बन सकता है किंतु यौन क्षेत्र में कभी भी महान नहीं होगा।
फ्रांसिस साकोयन
अंतर्मन की गहराइयों से उठने वाली विचित्र भावनात्मक इच्छाएं जो विद्यमान व्यवस्था के अनुरूप नहीं होतीं। यह पहलू विभिन्न प्रकार से अभिव्यक्त हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रवृत्तियों को दबाया जाता है अथवा नहीं। यदि दबाया जाता है, तो संभव है मनोविकृति, यौन अथवा मनोसomatic विकार, कभी-कभी मतिभ्रम। यदि नहीं दबाया जाता, तो मदिरापान, नशीली वस्तुओं का सेवन अथवा विलासिता। कभी-कभी मूर्खतापूर्ण कार्य, असमंजस अथवा गुप्त कारणों का अनुसरण। यदि कुंडली के अन्य अशुभ पहलू हों तो विश्वासघात, कपट अथवा अपयश। यौन विकृति जो कभी-कभी चित्रकर्म जैसे कलाओं में सकारात्मक रूप से प्रयुक्त की जा सकती है जहां कल्पना की आवश्यकता होती है। आत्म-प्रवंचना की प्रवृत्ति, क्योंकि अपने कार्यों के वास्तविक कारणों से अनभिज्ञ रहता है। लोगों के साथ संबंधों में भ्रम, संकोच एवं असमंजस। कल्पनाओं एवं अवांछित इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए जिससे कठिनाइयां उत्पन्न न हों। ज्योतिष अथवा मनोविज्ञान जैसे क्षेत्रों में व्यक्ति की वृश्चिक क्षमताएं प्रकाशमान हो सकती हैं। मनोविज्ञान में दूसरों की अवचेतन मनोवैज्ञानिक समस्याओं को समझने के लिए आत्मिक शक्ति की आवश्यकता होती है। भावनाओं पर नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
एस.वी. शेस्टोपालोव
आग्रह, कट्टरता, मनोवैज्ञानिक दृष्टिहीनता। व्यक्ति आदर्शवादी अथवा व्यक्तिपरक सिद्धांतों के आधार पर कार्य करता है जो वास्तविकता से दूर होते हैं। परिस्थितियों पर ध्यान देने में असमर्थ अथवा अनिच्छुक। मनोरोग अवस्थाएं, मनोग्रस्त अवस्थाएं, आत्म-प्रवंचना की प्रवृत्ति, धोखे अथवा स्वयं को धोखा देने की प्रवृत्ति, चोरी अथवा दूसरों की वस्तुओं के प्रति आकर्षण, कभी-कभी kleptomania। ऐसे व्यक्ति जादू-टोने के प्रति संवेदनशील होते हैं। सकारात्मक पक्ष में अक्सर उच्च आध्यात्मिक आकांक्षाएं, त्याग, धार्मिकता (प्रायः रूढ़िवादी) तथा आत्म-बलिदान का पहलू।




