क्विंकनक्स बुध – मंगल
(ट्रांज़िट. बुध → जन्म कुंडली. मंगल)
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अवेसेलॉम पॉडवॉडनी. दृष्टियाँ
क्विंकनक्स बुध: प्रत्येक शब्द का अपना सत्यार्थ होता है। यह दृष्टि ग्रहों के क्षेत्र में चिंतन की दिशा प्रदान करती है, किंतु इसका अर्थ केवल वैज्ञानिक कल्पना-कथा में रुचि तक ही सीमित नहीं है, अपितु इसमें पार्थिव बोध के तरीकों में कुछ कठिनाइयाँ भी सम्मिलित हैं, जो मनुष्य को अनेक छोटी-छोटी असुविधाओं का कारण बन सकती हैं, क्योंकि सामाजिक रूप से स्वीकृत चिंतन-पद्धति उसे नीरस, अपर्याप्त और असंतोषजनक प्रतीत होगी। उसके अपने विचार और तर्क उसे वस्तुनिष्ठ तथा चतुर प्रतीत हो सकते हैं, कभी-कभी तो सर्वव्यापी सत्य के समान, किंतु वास्तव में वे प्रायः दुर्बल पार्थिव बोध और असimilित ब्रह्मांडीय बुद्धि का मिलाजुला रूप होते हैं, जिनमें से तर्कसंगत अथवा स्वस्थ रहस्यमय तत्त्वों को ग्रहण करना अत्यंत कठिन होता है। जब क्विंकनक्स प्रबल होता है, मनुष्य अपने विचारों के अमानवीय प्रवाह को अनुभव करता है और या तो इससे भयभीत हो सकता है अथवा इसका स्वागत कर सकता है, जो क्विंकनक्स तथा कुंडली के अन्य प्रमुख दृष्टियों पर निर्भर करता है। किंतु ब्रह्मांडीय स्वरूप वाले अपने विचारों तथा उनके पार्थिव परिस्थितियों से सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता मनुष्य में धीरे-धीरे विकसित होती है। यदि कुंडली अथवा बुध (विशेषतः) दुर्बल हों, तो इस कारण व्यक्तित्व-विभाजन, ब्रह्मांडीय वैभव अथवा उत्पीड़न संबंधी भ्रम उत्पन्न हो सकते हैं। इस दृष्टि के शोधन के लिए सर्वप्रथम मनुष्य को ग्रहों के क्षेत्र में मानव-केंद्रित तथा भू-केंद्रित दृष्टिकोण त्यागकर ब्रह्मांडीय नैतिकता को आत्मसात करना होगा तथा द्वितीय, ब्रह्मांडीय रूप से अभिव्यक्त चिंतन को पार्थिव समस्याओं से सुसंगत करना होगा, जो सरल कार्य नहीं है, किंतु इसके परिणामस्वरूप असाधारण सृजनात्मक क्षमताएँ तथा ब्रह्मांडीय अभिमुखता प्राप्त होती है।
क्विंकनक्स मंगल: दुष्टता की शक्ति स्पष्ट है; सज्जनता की शक्ति का अनुमान इस अप्रत्यक्ष संकेत से लगाया जा सकता है कि दुष्टता अभी तक पूर्णतः परास्त नहीं हुई है। यह दृष्टि ग्रहों के क्षेत्र में पार्थिव तथा ब्रह्मांडीय कंपनों के मध्य ऊर्जा-अंतःक्रिया की समस्या उत्पन्न करती है। निम्न स्तर पर मनुष्य को पार्थिव ऊर्जा के प्रकारों की कमी अनुभव होती है, किंतु ब्रह्मांडीय ऊर्जा पर उसका अधिकार दुर्बल होता है, जिसके परिणामस्वरूप अनेक प्रकार के व्यवधान उत्पन्न होते हैं। उदाहरणार्थ, क्विंकनक्स मंगल-चंद्रमा मनुष्य को चिकित्सा-कला के प्रति प्रतिभा प्रदान कर सकता है, जिसे साधारण रैखिक मालिश के कौशल के रूप में प्रकट किया जा सकता है, किंतु मनुष्य इसे असाधारण रूप से प्रस्तुत करेगा। विशेषतः जब उत्तरदायी परिस्थितियों में उसके हाथ स्वतः ही गतिमान होने लगेंगे, यदि वह उन्हें विश्वास करने में समर्थ हो सके। किंतु यह सरल नहीं है, क्योंकि अवचेतन मन (व्यक्तिगत तथा सामाजिक) सहज बुद्धि अथवा असाधारण ऊर्जा कंपनों से उत्पन्न गतियों पर विश्वास नहीं करता।
क्विंकनक्स मंगल मनुष्य के सक्रियता की ऊर्जा के स्तर की समस्या उत्पन्न करता है, जिसका अर्थ है कि उसे अपने ऊर्जा रूपों का सटीक चयन तथा अपनी आंतरिक ऊर्जा पर सटीक नियंत्रण आवश्यक है, क्योंकि यह दृष्टि कठोर संवेगात्मक अवस्थाओं तथा सहज प्रवृत्तियों के उग्र प्रदर्शन की ब्रह्मांडीय अस्वीकार्यता को उजागर करेगी। उदाहरणार्थ, क्विंकनक्स शुक्र-मंगल के अंतर्गत जहाँ प्रेम के कठोर किंतु सामाजिक रूप से स्वीकार्य प्रदर्शन होते हैं, वे मनुष्य को ब्रह्मांडीय दृष्टि से पूर्णतः अस्वीकार्य प्रतीत होंगे, जिसके विषय में ब्रह्मांड उसे असामान्य विधियों से संकेत दे सकता है। किंतु कालांतर में मनुष्य इस तथ्य को स्वीकार कर लेगा कि प्रेम में उसे अत्यंत सावधान रहना चाहिए। जब इसका शोधन किया जाएगा, जो सर्वप्रथम प्रेम करने वाले को एक आध्यात्मिक सत्ता के रूप में देखने की दृष्टि अपनाने से आरंभ होता है, तब मनुष्य अत्यंत गहन, सूक्ष्म तथा गंभीर संबंध स्थापित करने में समर्थ हो सकेगा।




